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सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण: इमरान मसूद ने चेताया, ‘संभल बनाने की साजिश’, जानिए पूरा मामला

सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण पर गरमाई सियासत

सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को प्रशासन द्वारा अचानक ध्वस्त किए जाने के बाद से ही शहर में तनाव का माहौल है। बिना किसी पूर्व नोटिस के हुई इस कार्रवाई ने न केवल स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है। अब यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुंच गया है, जहां आने वाले दिनों में सुनवाई की उम्मीद है।

क्या है पूरा मामला?

शनिवार को प्रशासन ने कलक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को बुलडोजर से ढहा दिया। मस्जिद प्रबंधन कमेटी ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से अवैध और दमनकारी बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में साफ कहा गया है कि प्रशासन ने न तो कोई नोटिस दिया और न ही ‘प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट’ (धार्मिक स्थल अधिनियम) का सम्मान किया। मस्जिद प्रबंधन ने प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों को अनदेखा किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं।

इमरान मसूद का तीखा बयान

सहारनपुर के कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस घटना को एक गहरी साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा, ‘सहारनपुर को संभल बनाने की साजिश रची जा रही है।’ मसूद ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि पहले मस्जिदों में वजू के लिए कुएं हुआ करते थे, जो एक समृद्ध विरासत की निशानी थे। उन्होंने प्रशासन के रुख पर सवाल उठाते हुए इसे सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला कदम बताया है।

एएसआई की जांच और हुदा जरीवाला की जमानत

ध्वस्तीकरण के दौरान मस्जिद परिसर से एक पुरानी कुएं जैसी संरचना मिली है, जिसने अब एक नया मोड़ ले लिया है। पुरातत्व विभाग (ASI) अब इसकी जांच कर रही है और एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपेगी। वहीं, इस मामले पर भड़काऊ टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार यूट्यूबर हुदा जरीवाला को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत से जमानत मिल गई है। रिहाई के बाद वह वापस दिल्ली लौट गई हैं।

मायने और प्रभाव

  • कानूनी लड़ाई: हाईकोर्ट का फैसला यह तय करेगा कि प्रशासनिक बुलडोजर और कानूनी प्रक्रिया के बीच संतुलन क्या होना चाहिए।
  • सांप्रदायिक सौहार्द: इमरान मसूद जैसे नेताओं का इसे ‘संभल जैसी साजिश’ बताना शहर की शांति व्यवस्था के लिए एक चेतावनी जैसा है।
  • ऐतिहासिक विरासत: एएसआई की रिपोर्ट यह स्पष्ट करेगी कि कलक्ट्रेट की यह जमीन और उस पर बनी संरचना कितनी पुरानी थी, जो आने वाले समय में कानूनी साक्ष्य का आधार बनेगी।

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