सुहागिनों के लिए साल का सबसे खास दिन इस बार लखनऊ में कुछ अलग रहा। करवा चौथ का व्रत रखकर चांद के दीदार का इंतजार कर रहीं महिलाओं के लिए चक्रवात ‘अर्नब’ किसी परीक्षा से कम नहीं साबित हुआ। आसमान में घने बादलों का डेरा रहा, जिसके चलते शहर के ज्यादातर इलाकों में चांद बादलों की ओट में ही छिपा रहा।
बादलों की लुका-छिपी और मायूस चेहरे
राजधानी के चिनहट, गोमती नगर और हजरतगंज जैसे इलाकों में शाम ढलते ही महिलाएं छतों और बालकनियों पर जमा हो गई थीं। उम्मीद थी कि बादलों के बीच से चांद की एक झलक मिल जाएगी, लेकिन चक्रवात अर्नब के असर से हुई हल्की बूंदाबांदी और घने कोहरे ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। शहर के कई हिस्सों में तो महिलाएं केवल प्रतीकात्मक चांद देखकर या टीवी पर देखकर ही व्रत खोलने को मजबूर हुईं।
डिप्टी सीएम ने सादगी के साथ निभाई परंपरा
इस विपरीत मौसम के बावजूद, लखनऊ में श्रद्धा कम नहीं दिखी। डिप्टी सीएम ने अपने आवास पर पत्नी के साथ पूरी निष्ठा से करवा चौथ की पूजा अर्चना की। तस्वीरों में उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए व्रत संपन्न किया, जो शहर के आम नागरिकों के लिए एक मिसाल बना। मौसम की मार के बावजूद, लोगों ने अपनी आस्था और परंपराओं को प्राथमिकता दी।

मायने और प्रभाव: आम जनता पर असर
- धार्मिक लचीलापन: इस बार के करवा चौथ ने यह साबित किया कि प्रतिकूल मौसम और प्राकृतिक आपदाओं के बीच भी आम जनता अपनी आस्था के प्रति कितनी अडिग है।
- मौसम का मिजाज: चक्रवात अर्नब का असर केवल करवा चौथ तक सीमित नहीं है, आने वाले दिनों में लखनऊ और आसपास के जिलों में तापमान में गिरावट और बारिश के आसार बने हुए हैं।
- आर्थिक पहलू: त्योहार पर हुई बारिश और बादलों का असर बाजारों पर भी दिखा, जहां पूजन सामग्री की बिक्री तो हुई, लेकिन उमंग में थोड़ी कमी देखी गई।
मौसम विभाग ने पहले ही चक्रवात अर्नब को लेकर अलर्ट जारी किया था, जिसका असर राजधानी की दैनिक जीवनशैली पर साफ देखने को मिल रहा है। प्रशासन ने भी लोगों को एहतियात बरतने की सलाह दी है।


