महोबा की सड़कों पर छाई ये तस्वीर किसी को भी झकझोर देने के लिए काफी है। शहर में हुई महज आधे घंटे की बारिश ने नगर पालिका के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। आलम यह है कि मासूम बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर कमर तक भरे पानी में से गुजरने को मजबूर हैं, जबकि उनके स्कूल के बस्ते सिर पर सुरक्षित रखने की जद्दोजहद साफ देखी जा सकती है।
सफाई के दावों पर पानी का प्रहार
बारिश शुरू होते ही शहर के कई निचले इलाकों में जलभराव की समस्या गंभीर हो गई। जल निकासी की कोई पुख्ता व्यवस्था न होने के कारण सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं। स्कूल से लौट रहे नन्हे-मुन्नों को घुटने ही नहीं, बल्कि कमर तक भरे गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ा, जो न केवल असुविधाजनक है बल्कि बीमारियों का घर भी है।
प्रशासन की विफलता और आम जन की मुसीबत
स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल बरसात के मौसम में यही स्थिति होती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजों पर काम पूरा करने का दावा करते हैं। नाले चोक पड़े हैं और नालियों की सफाई न होने की वजह से पानी निकासी के रास्ते बंद हैं। महोबा के मुख्य रास्तों पर जलभराव के कारण आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है।

मायने और प्रभाव: क्यों है यह चिंता का विषय?
- स्वास्थ्य का खतरा: जलभराव के कारण दूषित पानी में चलने से बच्चों को चर्म रोग और संक्रमण का गंभीर खतरा बना रहता है।
- शिक्षा में बाधा: इस तरह की अव्यवस्था छात्रों के मनोबल को गिराती है और स्कूल जाने के प्रति उनकी रुचि को प्रभावित करती है।
- प्रशासनिक लापरवाही: यह तस्वीरें दिखाती हैं कि शहर का बुनियादी ढांचा कितना कमजोर है और मानसून की तैयारी के नाम पर करोड़ों रुपये का निवेश आखिर कहाँ गया?
यह स्थिति केवल एक दिन की बारिश का नतीजा नहीं है, बल्कि सालों से चली आ रही उपेक्षा का परिणाम है। समय रहते अगर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो महोबा की जनता का यह संघर्ष और भी विकराल रूप ले सकता है।



