टोल में एक्सप्रेसवे को भी मात, सड़क पर मौत का सन्नाटा
वाराणसी से शक्तिनगर को जोड़ने वाला स्टेट हाईवे इन दिनों चर्चा का केंद्र बना है, लेकिन किसी विकास के कारण नहीं, बल्कि अपनी बदहाली की वजह से। अगर आप इस सड़क से सफर कर रहे हैं, तो न सिर्फ आपकी जेब पर भारी चोट पड़ रही है, बल्कि आपकी जान भी दांव पर है। हैरानी की बात यह है कि यहां वसूला जाने वाला टोल टैक्स देश के पांच प्रमुख एक्सप्रेसवे से भी ज्यादा है।
80 किलोमीटर में 12 मौत के कुएं
सोनभद्र के इलाके से गुजरने वाले इस 80 किलोमीटर लंबे हाईवे की हालत किसी डरावने सपने से कम नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे रूट पर 12 ऐसे खतरनाक ब्लैक स्पॉट हैं जहां आए दिन हादसे होते हैं। प्रशासन की ढिलाई का आलम यह है कि इन पॉइंट्स को सुधारने के बजाय इसे सिर्फ फाइलों में दर्ज कर लिया गया है।
40 जगहों पर सड़क धंसी, सफर जानलेवा
इतना ही नहीं, सड़क के हाल और भी बुरे हैं। हाईवे के करीब 40 अलग-अलग स्थानों पर सड़क पूरी तरह धंस चुकी है, जिससे वाहनों का संतुलन बिगड़ना आम बात है। प्रति किलोमीटर 3.05 रुपये का टोल चुकाने के बाद भी वाहन चालकों को गड्ढों और धंसी हुई सड़क पर गाड़ी चलाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
मायने और प्रभाव: आम जनता पर असर
इस हाईवे की स्थिति सीधे तौर पर आम आदमी की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था से जुड़ी है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- आर्थिक बोझ: एक्सप्रेसवे जैसी सुविधाएं न मिलने के बावजूद उससे ज्यादा टोल वसूलना आम जनता के साथ एक तरह की लूट है।
- सुरक्षा का सवाल: 12 ब्लैक स्पॉट और 40 धंसी हुई जगहें यह साफ बताती हैं कि सड़क का मेंटेनेंस कागजों तक ही सीमित है।
- परिवहन की चुनौती: सोनभद्र जैसे औद्योगिक क्षेत्र के लिए यह मुख्य लाइफलाइन है, और इसकी जर्जर हालत सीधे तौर पर माल ढुलाई और व्यापार को प्रभावित कर रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित ठेका कंपनियों की मिलीभगत के कारण ही आज यह हाईवे ‘सड़क’ कम और ‘मौत का जाल’ ज्यादा बन गया है। सरकार को जल्द से जल्द इसकी मरम्मत और टोल दरों की समीक्षा करनी होगी, अन्यथा किसी बड़े हादसे का इंतजार करना एक गंभीर चूक होगी।




