गोरखपुर पुलिस महकमे में इन दिनों एक सिपाही की ‘सियासी छलांग’ चर्चा का केंद्र बनी हुई है। डायल-112 में तैनात रहे सिपाही श्याम सुंदर चौहान पिछले काफी समय से अपनी ड्यूटी से नदारद हैं। लेकिन, वर्दी में नजर न आने वाले ये सिपाही अब समाजवादी पार्टी के झंडे के नीचे पूरी सक्रियता से काम कर रहे हैं।
ड्यूटी से गायब, सियासी मैदान में तैयार
श्याम सुंदर चौहान लंबे समय से बिना किसी सूचना के ड्यूटी से गैरहाजिर चल रहे हैं, जिसके चलते पुलिस विभाग ने उन्हें पहले ही निलंबित कर दिया है। वर्दी की अनुशासनहीनता के बाद अब उनकी नजरें राजनीति के मैदान पर टिकी हैं। सिपाही साहब अब संतकबीरनगर की धनघटा विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनावी ताल ठोकने की तैयारी कर रहे हैं।
विभाग की बढ़ी टेंशन
एक सरकारी कर्मचारी का इस तरह सीधे चुनावी राजनीति में उतरना और पार्टी के कार्यक्रमों में फ्रंट फुट पर दिखना, पुलिस प्रशासन के लिए सिरदर्द बन गया है। विभाग की ओर से उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है, लेकिन श्याम सुंदर चौहान का पूरा ध्यान अब अखिलेश यादव की साइकिल के साथ अपने भविष्य को संवारने पर है।
मायने और प्रभाव
इस घटना ने वर्दी के अनुशासन और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के बीच की रेखा को धुंधला कर दिया है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- अनुशासन पर सवाल: पुलिस जैसे संवेदनशील विभाग में लंबे समय तक अनुपस्थित रहकर राजनीति में सक्रिय होना, विभागीय सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े करता है।
- चुनावी समीकरण: धनघटा विधानसभा सीट पर एक पुलिसकर्मी का बतौर उम्मीदवार उतरना स्थानीय राजनीति में समीकरणों को बदल सकता है।
- आम जनता पर असर: यह मामला साफ संदेश देता है कि सरकारी सेवक अब राजनीति को करियर के रूप में देख रहे हैं, जो आने वाले समय में प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलावों का संकेत हो सकता है।





