तवांग से लेकर LAC तक तनाव बरकरार
अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर भारत और चीन के बीच जारी तनातनी एक बार फिर केंद्र बिंदु में आ गई है। ITBP के महानिदेशक के हालिया खुलासे ने स्पष्ट कर दिया है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिति अभी भी सामान्य नहीं है। चीनी सैनिकों की गतिविधियों ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने के लिए मजबूर कर दिया है।
क्या बोले ITBP चीफ?
रिटायरमेंट से ठीक पहले ITBP प्रमुख ने स्वीकार किया कि अरुणाचल सेक्टर में चीन के साथ लगातार झड़पें और आमना-सामना जारी है। उन्होंने साफ कहा कि गलवान जैसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए भारतीय सुरक्षा बल अपनी रणनीति में बदलाव कर रहे हैं। अब पूरा फोकस ड्रोन फोर्स और अत्याधुनिक तकनीक पर है ताकि किसी भी घुसपैठ को तुरंत नाकाम किया जा सके।
सियासी घमासान और विपक्षी सवाल
इस बयान के बाद देश की राजनीति में हलचल मच गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सीमा की सुरक्षा पर ‘फोटो ऑप’ नहीं, बल्कि ठोस जवाबदेही चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि सरकार चीन के मसले पर संसद में चर्चा से बच रही है।
सैन्य दृष्टिकोण: क्या है हकीकत?
- ड्रोन सर्विलांस: पहाड़ी इलाकों में निगरानी के लिए ड्रोन फोर्स को प्राथमिकता।
- शौर्य कमांडो: किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए विशेष कमांडो तैनात।
- रणनीतिक बदलाव: पूर्व आर्मी चीफ एम.एम. नरवणे के अनुसार, सीमा विवाद का अब कोई केवल सैन्य समाधान संभव नहीं दिख रहा।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्यों जरूरी?
सीमा पर तनाव सीधे तौर पर देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था से जुड़ा होता है। जब भी बॉर्डर पर ऐसी खबरें आती हैं, तो इसका सीधा असर रक्षा बजट और डिप्लोमेटिक रिश्तों पर पड़ता है। अरुणाचल का मामला केवल एक इलाका नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता का सवाल है। भविष्य में सीमा पर चीन के आक्रामक रवैये के कारण सरकार को रक्षा क्षेत्र में और अधिक निवेश करना पड़ सकता है, जिसका असर बुनियादी ढांचे के विकास की गति पर भी पड़ सकता है।





