लखनऊ की तपती सड़कों पर इस वक्त पारा आसमान छू रहा है, लेकिन घर की चारदीवारी के अंदर भी लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। भीषण गर्मी के बीच राजधानी की बिजली व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी हो गई है, जिससे परेशान होकर अब जनता का सब्र जवाब दे गया है।
उपकेंद्रों पर मचा हाहाकार
गुरुवार देर रात लखनऊ के कई बिजली उपकेंद्रों पर हालात तनावपूर्ण हो गए। घंटों की अघोषित बिजली कटौती से झुंझलाए स्थानीय निवासियों ने बिजली घरों का घेराव करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन ने हंगामे और उपद्रव का रूप ले लिया।
हालात इतने बिगड़ गए कि उपकेंद्रों पर मौजूद कर्मचारी अपनी जान बचाकर भागने को मजबूर हुए। कर्मचारियों ने कार्यालयों के गेट पर ताले लगा दिए और सुरक्षा की दृष्टि से वहां से हट गए, जिससे इलाके में पूरी तरह से अंधेरा छा गया।
आखिर क्यों बिगड़े हालात?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिजली विभाग न तो फोन उठा रहा है और न ही फॉल्ट ठीक करने के लिए कोई ठोस कदम उठा रहा है। ओवरलोडिंग और मेंटेनेंस की कमी के कारण बार-बार ट्रिपिंग हो रही है, जिससे लोग रात भर जागने को मजबूर हैं।
- भीषण गर्मी में घंटों बिजली गुल रहने से जनजीवन अस्त-व्यस्त।
- बिजली उपकेंद्रों पर सुरक्षा का अभाव और कर्मचारियों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया।
- आम जनता में भारी आक्रोश, सोशल मीडिया पर लोग प्रशासन को घेर रहे हैं।
मायने और प्रभाव
इस पूरी स्थिति का सबसे बुरा असर बीमारों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों पर पड़ रहा है। लखनऊ जैसे बड़े शहर में बिजली का इस तरह लड़खड़ाना बुनियादी ढांचे की पोल खोलने के लिए काफी है। यदि स्थिति पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो शहर के अलग-अलग हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भड़क सकते हैं। शासन और प्रशासन को अब कागजी दावों से आगे बढ़कर जमीनी हकीकत पर काम करने की जरूरत है, ताकि लोगों को इस चिलचिलाती गर्मी में बुनियादी राहत मिल सके।



