लखनऊ में गोमती नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया है। शहर के प्रमुख अंत्येष्टि स्थल गुलाला घाट पर बाढ़ का पानी भर जाने से हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं। स्थिति यह है कि अंतिम संस्कार के लिए शवों को ले जाना अब एक बड़ी चुनौती बन गई है।
गुलाला घाट पर पानी का कब्जा
पिछले तीन दिनों से गुलाला घाट का अंत्येष्टि स्थल पानी में डूबा हुआ है। रविवार को घाट की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर डेढ़ फीट से ज्यादा पानी तेज बहाव के साथ बहता रहा। शोक में डूबे परिजनों को मजबूरन इसी पानी के बीच से गुजरकर अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार करने के लिए चबूतरे तक पहुंचना पड़ रहा है।
अव्यवस्थाओं से जूझते लोग
घाट की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि परिसर में एक फीट तक पानी भरा हुआ है, जिससे दाह संस्कार के लिए रखी लकड़ियाँ भी पूरी तरह भीग चुकी हैं। घाट की देखरेख करने वाले वीरेंद्र पांडे ने बताया कि बिजली आपूर्ति ठप होने की वजह से विद्युत शवदाह गृह भी बंद पड़ा है।
- घाट तक पहुँचने वाली सड़कों पर डेढ़ से दो फीट तक जलभराव।
- गैस सिलिंडर जैसी जरूरी सेवाओं तक पहुँचने के लिए भी लोगों को पानी से गुजरना पड़ रहा है।
- प्रेरणा स्थल के कार्यालय को सुरक्षित रखने के लिए गेट पर रेत की बोरियां लगाई गई हैं।
- आईआईएम मार्ग से फैजुल्लागंज जाने वाली सड़क पर पानी का तेज बहाव बना हुआ है।
मायने और प्रभाव: आम जनता पर क्या असर?
गोमती की इस बाढ़ ने न केवल जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है, बल्कि शहर की बुनियादी सुविधाओं की पोल भी खोल दी है। अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में आ रही बाधाएं प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठाती हैं। जब शहर का प्रमुख घाट ही जलमग्न हो जाए, तो इससे न केवल स्वच्छता का संकट पैदा होता है, बल्कि आम नागरिकों को भारी मानसिक और शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन को ऊंचे स्थानों पर वैकल्पिक व्यवस्थाएं तैयार रखनी होंगी ताकि संकट के समय किसी को भी इतनी बड़ी परेशानी न उठानी पड़े।


