‘पापा, आग लग गई है, बचा लो’ – एक पिता का वह आखिरी कॉल
लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग ने न केवल एक होनहार युवा की जान ली, बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। अपनी मौत से ठीक पहले उस युवक की अपने पिता को की गई आखिरी कॉल – ‘पापा, आग लग गई है, मुझे बचा लो’ – आज हर उस अभिभावक के दिल में डर पैदा कर रही है, जिनके बच्चे सपनों को पूरा करने के लिए शहर के अलग-अलग कोचिंग सेंटर्स में पढ़ने जाते हैं।
कानपुर से अलीगढ़ तक एक्शन मोड में प्रशासन
इस दुखद घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। कानपुर के काकादेव इलाके में केडीए (KDA) ने ताबड़तोड़ छापेमारी करते हुए 30 कोचिंग सेंटर्स को सील कर दिया है। ये वे संस्थान थे जो सुरक्षा के न्यूनतम मानकों को पूरा नहीं कर रहे थे।
इसी तरह की कार्रवाई अलीगढ़ में भी देखने को मिली है, जहां नौ कोचिंग सेंटर को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। फायर एनओसी (NOC) न होना और आपातकालीन निकास का अभाव इन संस्थानों की सबसे बड़ी खामी पाई गई है।
सुरक्षा मानकों को लेकर उठ रहे बड़े सवाल
- क्या कोचिंग सेंटर केवल कमाई का जरिया बनकर रह गए हैं?
- भवन निर्माण नियमावली का पालन क्यों नहीं किया जा रहा?
- फायर विभाग की एनओसी को महज कागज का टुकड़ा क्यों समझा जा रहा है?
वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा है कि ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए अब सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि धरातल पर सख्त नियमों का पालन अनिवार्य है।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्यों जरूरी है यह?
यह घटना एक बड़ा सबक है। जब भी हम अपने बच्चों का दाखिला किसी संस्थान में कराते हैं, तो फीस के साथ-साथ वहां की सुरक्षा व्यवस्था को परखना अब हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। लखनऊ की यह घटना प्रशासन के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है। यदि कोचिंग संस्थानों ने सुरक्षा मानकों को गंभीरता से नहीं लिया, तो प्रशासन का डंडा चलना तय है। आने वाले दिनों में प्रदेश भर के शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा ऑडिट का दौर तेज होगा, ताकि किसी और पिता को वो आखिरी डरावनी कॉल न सुननी पड़े।




