राजस्थान इस वक्त कुदरत के एक अजीब खेल का गवाह बना हुआ है। मानसून की मेहरबानी एक तरफ तो कुछ जिलों के लिए आफत बन गई है, तो दूसरी तरफ आधा प्रदेश सूखे की मार झेल रहा है। कहीं सड़कों पर नदियां बह रही हैं, तो कहीं किसान आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं।
कहीं उफनती नदियां, कहीं सूखती जमीन
राज्य के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में मानसून की सक्रियता ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। उदयपुर के लसाड़िया में हुई 9.5 इंच बारिश ने तबाही मचा दी है, जहां नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। जोधपुर जैसे शहरों में जलभराव के चलते ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया है और सड़कें दरिया में तब्दील हो गई हैं।
दूसरी ओर, सरकारी आंकड़े चिंताजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं। राज्य के 12 ऐसे जिले हैं जहां अब भी सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। वहां की जमीन पानी को तरस रही है, जिससे खरीफ की फसलें बर्बाद होने की कगार पर हैं।
मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विभाग ने आने वाले 24 से 48 घंटों के लिए प्रदेशभर में अलर्ट जारी किया है। विशेष रूप से डूंगरपुर और बांसवाड़ा के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया गया है। यहाँ अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है, जिससे निचले इलाकों में पानी भर सकता है।
- ऑरेंज अलर्ट: उदयपुर, जालोर और आसपास के जिलों में भारी बारिश की चेतावनी।
- सावधानी: प्रशासन ने लोगों से जलभराव वाले इलाकों और रपटों पर न जाने की अपील की है।
मायने और प्रभाव: आम जनता पर क्या असर?
राजस्थान की इस विषम मौसमी स्थिति का सीधा असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। जिन जिलों में औसत से अधिक बारिश हुई है, वहां फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है, जो सीधे तौर पर महंगाई को प्रभावित करेगा। वहीं, सूखे की मार झेल रहे 12 जिलों में चारे और पेयजल का संकट गहरा सकता है।
अगले कुछ दिन राज्य के प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती हैं। शहरी क्षेत्रों में जलभराव के प्रबंधन के साथ-साथ, उन किसानों की सुध लेना भी जरूरी है जिनकी फसलें या तो बारिश में बह गईं या सूखे के कारण लहलहा नहीं सकीं। आम नागरिक के तौर पर, भारी बारिश वाले इलाकों में सतर्क रहना और स्थानीय प्रशासन की गाइडलाइंस का पालन करना ही फिलहाल बचाव का एकमात्र रास्ता है।

