"रोज नई ऊर्जा, नई सोच के साथ"

ताजा खबर पडरौना कुशीनगर उत्तर प्रदेश राजनीति क्रिकेट स्पोर्ट्स देश विदेश मौसम बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल राशिफल आध्यात्मिक अन्य

सिटी इंस्टीट्यूट

ऑफ पैरामेडिकल कॉलेज

ADMISSION OPEN
DMLT | DPT | ऑपरेशन थियेटर टेक्निशियन
एवं अन्य पैरामेडिकल कोर्स
9984858492

रवि किशन के ‘गोरखपुर को स्पेन बनाने’ वाले दावे पर काजल निषाद का तीखा प्रहार, ‘गांजा-समोसा’ वाली टिप्पणी पर मची खलबली

गोरखपुर की राजनीति में इन दिनों बयानों के तीर खूब चल रहे हैं। बीजेपी सांसद और मशहूर अभिनेता रवि किशन ने जब अपने संसदीय क्षेत्र गोरखपुर की तुलना ‘स्पेन’ से कर दी, तो शहर से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। इस दावें पर सपा नेता काजल निषाद ने जो पलटवार किया है, उसने इस बहस को एक नया और तीखा मोड़ दे दिया है।

क्या था रवि किशन का ‘स्पेन’ वाला बयान?

दरअसल, एक कार्यक्रम के दौरान रवि किशन ने गोरखपुर के विकास कार्यों की तारीफ करते हुए कहा कि आज उनका शहर विकास के मामले में स्पेन जैसे देशों को टक्कर दे रहा है। मंच पर मौजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी यह सुनकर मुस्कुराते नजर आए। रवि किशन का मकसद शहर में हुए इंफ्रास्ट्रक्चर बदलावों को हाईलाइट करना था, लेकिन यह बयान विपक्ष के लिए एक बड़ा मौका बन गया।

काजल निषाद ने कसा करारा तंज

सपा नेत्री और पूर्व भोजपुरी अभिनेत्री काजल निषाद ने रवि किशन के इस दावे की हवा निकालते हुए बेहद तीखी टिप्पणी की। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ‘अरे जो गांजा भरकर समोसा खाएंगे, उनके यहां तो स्पेन बनेगा ही।’ काजल का यह बयान सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है, जहां लोग इसे रवि किशन के पुराने ‘गांजा’ विवादों से जोड़कर देख रहे हैं।

मायने और प्रभाव: गोरखपुर की सियासत पर असर

यह जुबानी जंग केवल व्यक्तिगत हमलों तक सीमित नहीं है। इसके राजनीतिक मायने गहरे हैं:

  • विकास बनाम हकीकत: आम जनता अब विकास के बड़े दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को लेकर सवाल पूछ रही है।
  • आगामी चुनाव: काजल निषाद का यह अंदाज दर्शाता है कि विपक्ष अब रवि किशन की छवि को सीधे तौर पर निशाना बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
  • सोशल मीडिया का दखल: इस तरह की टिप्पणियाँ युवा मतदाताओं को प्रभावित करती हैं, जो राजनीतिक बहस को मीम्स और चर्चाओं में तब्दील कर देते हैं।

गोरखपुर की जनता अब यह देखना चाहती है कि विकास के दावों के बीच शहर की बुनियादी समस्याओं का समाधान कब तक निकलता है। क्या वाकई गोरखपुर स्पेन की राह पर है या यह केवल शब्दों का मायाजाल है, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment