रक्षाबंधन के त्योहार ने आगरा के बाजारों में एक ऐसी रौनक फूंकी है, जिसने बीते महीनों की मंदी को पीछे छोड़ दिया है। राखी बांधने के शुभ अवसर पर शहर की गलियां ग्राहकों की भीड़ से गुलजार हैं और व्यापारियों के चेहरे पर मुस्कान वापस लौट आई है।
मिठाई से लेकर ज्वेलरी तक छाई रौनक
पिछले दो दिनों में आगरा के प्रमुख बाजारों में जो खरीदारी हुई है, उसने सभी अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार और बुधवार के बीच मिठाई, राखी, कॉस्मेटिक्स, ज्वेलरी और कपड़ों के व्यापार ने 100 करोड़ रुपये का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है।
विशेष रूप से लुहार गली, राजा की मंडी और सुभाष बाजार जैसे इलाकों में तिल रखने की जगह नहीं थी। मूसलाधार बारिश भी खरीदारों के उत्साह को कम नहीं कर सकी। शहर की नामचीन मिठाई दुकानों पर तो लंबी कतारें देखी गईं, जहां घेवर और विशेष मिठाई पैक कराने के लिए लोग घंटों इंतजार करते दिखे।
डिजिटल दौर में भी धागे की साख बरकरार
इस बार बाजार में राखियों की गजब वैरायटी देखने को मिली। जहां एक तरफ बच्चों के लिए कार्टून वाली राखियां पसंद की जा रही थीं, वहीं दूसरी तरफ महिलाओं के लिए स्टोन वर्क और एथनिक राखियों की जबरदस्त मांग रही।
- मिठाई का बाजार: करीब 35 करोड़ का कारोबार।
- कपड़े और गिफ्ट्स: 40 करोड़ के आसपास की बिक्री।
- ज्वेलरी और अन्य सामान: लगभग 25 करोड़ का निवेश।
मायने और प्रभाव
इस त्योहारी सीजन की सफलता का सीधा असर आगरा की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। यह बंपर बिक्री केवल व्यापारियों के लिए मुनाफा नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि आम जनता की खर्च करने की क्षमता और त्योहारों को लेकर उत्साह फिर से चरम पर है।
व्यापार मंडल के अनुसार, राखी का यह उत्सव छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े शोरूम मालिकों तक के लिए ‘लाइफलाइन’ साबित हुआ है। आगरा जैसे पर्यटन और हस्तशिल्प आधारित शहर में ऐसी आर्थिक गतिविधियां बाजार के चक्र को गति प्रदान करती हैं, जिससे आने वाले अन्य त्योहारों के लिए भी बाजार में नई उम्मीदें जगी हैं।





