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यूपी होमगार्ड भर्ती की रेस में शिवम से तेज दौड़ी मौत: सरकारी नौकरी का सपना बना परिवार का आखिरी गम

सपनों की दौड़ में थम गई सांसें

सरकारी नौकरी का जुनून क्या होता है, यह बरेली के शिवम यादव के परिवार से पूछिए। मुरादाबाद में चल रही होमगार्ड भर्ती की दौड़ में शिवम अपनी मंजिल से महज 50 मीटर दूर था कि अचानक उसकी सांसें थम गईं। कंप्यूटर साइंस इंजीनियर शिवम ने 12 में से 11 राउंड पूरी मेहनत से पूरे किए, लेकिन अंतिम कदम उठाते ही काल ने उसे अपने आगोश में ले लिया।

कौन था शिवम? मेधावी छात्र से एक ‘अधूरा सपना’

27 वर्षीय शिवम यादव एक साधारण युवक नहीं, बल्कि एक होनहार इंजीनियर था। राजकीय इंटर कॉलेज से 90 प्रतिशत अंकों के साथ इंटर पास करने वाले शिवम ने 2019 में बीटेक पूरा किया था। उसके पास सितारगंज की एक निजी कंपनी में 20 हजार रुपये की नौकरी थी, लेकिन उसका दिल घर के करीब एक सरकारी वर्दी में बसता था।

  • योग्यता: मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक।
  • लक्ष्य: सरकारी सेवा, ताकि परिवार के साथ रह सके।
  • संघर्ष: रेलवे लोको पायलट की परीक्षा भी पास कर चुका था।

परिवार का दर्द: इतिहास खुद को दोहरा रहा है

शिवम के पिता विनोद यादव, जो बरेली बार एसोसिएशन के पूर्व कोषाध्यक्ष हैं, आज पूरी तरह टूट चुके हैं। उनका कहना है कि उनके परिवार पर दुखों का साया पुराना है। शिवम के दादा भी रेलवे में नौकरी के लिए प्रशिक्षण के दौरान हादसे का शिकार हो गए थे। अब शिवम की मौत ने उस जख्म को दोबारा हरा कर दिया है। महज दो महीने पहले ही शिवम ने नोएडा में अपने पिता की जान बचाई थी, जब वे मैनहोल में गिर गए थे। आज बेटा पिता को बचाने वाला खुद मौत को नहीं हरा पाया।

मायने और प्रभाव: सरकारी नौकरी का बढ़ता दबाव

शिवम की मौत केवल एक भर्ती प्रक्रिया का हादसा नहीं है, बल्कि यह उन लाखों युवाओं की व्यथा है जो निजी क्षेत्र की अस्थिरता से तंग आकर सरकारी नौकरी की अंधी दौड़ में शामिल हो रहे हैं।

इसके मायने क्या हैं?
आज के दौर में उच्च शिक्षित युवा भी होमगार्ड जैसी भर्तियों के लिए जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं। यह समाज और सिस्टम के लिए एक चेतावनी है। शारीरिक दक्षता परीक्षाओं में सुरक्षा मानकों की कमी और युवाओं पर बढ़ता मानसिक-शारीरिक दबाव आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती बन सकता है। शासन-प्रशासन को ऐसी भर्तियों के दौरान स्वास्थ्य परीक्षण और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी व सुदृढ़ बनाना होगा, ताकि कोई और घर का चिराग इस तरह न बुझे।

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