दीपावली की चमक-धमक के बीच धनतेरस का इंतजार हर कोई करता है, लेकिन इस साल धनतेरस से पहले ही खरीदारी का एक ऐसा ‘महामुहूर्त’ आ गया है जो ज्योतिष शास्त्र में बेहद दुर्लभ माना जाता है। पंचांग के अनुसार, कल यानी एक नवंबर को रवि पुष्य नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बन रहा है।
क्या है रवि पुष्य नक्षत्र का महत्व?
ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक, रवि पुष्य नक्षत्र का संयोग साल में कुछ ही बार बनता है। इसकी तुलना सीधे तौर पर अक्षय तृतीया से की गई है। मान्यता है कि इस नक्षत्र में की गई खरीदारी और निवेश का फल लंबे समय तक बना रहता है और यह घर में सुख-समृद्धि का संचार करता है।
खरीदारी के लिए शुभ समय
अगर आप कल कोई बड़ी खरीदारी करने की योजना बना रहे हैं, तो समय का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। पंचांग के अनुसार:
- शुरुआत: 1 नवंबर को सुबह 10:37 बजे से।
- समापन: 2 नवंबर की सुबह 09:04 बजे तक।
इस दौरान आप सोना, चांदी, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या अपनी मनपसंद की कोई भी वस्तु बिना किसी संकोच के खरीद सकते हैं। इसे ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है, जिसमें किसी भी नए काम की शुरुआत करना उत्तम फलदायी होता है।
मायने और प्रभाव: आम जन पर असर
रवि पुष्य का यह महामुहूर्त केवल धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर बाजार और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। वाराणसी जैसे बड़े शहरों के बाजारों में इस दिन भारी रौनक देखने को मिलती है। व्यापारियों के लिए यह दिन बिक्री के रिकॉर्ड तोड़ने वाला होता है, तो वहीं आम ग्राहकों के लिए अपनी पसंदीदा चीजों को घर लाने का सुनहरा मौका। यह मुहूर्त उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो निवेश के नजरिए से सोना या संपत्ति खरीदना चाहते हैं। लंबे समय में इसका आर्थिक लाभ तो मिलता ही है, साथ ही यह खरीदारी के प्रति सकारात्मक मानसिक दृष्टिकोण भी विकसित करता है।





