उत्तर प्रदेश की पुलिसिंग व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं। सहारनपुर के डीआईजी और मुजफ्फरनगर के तत्कालीन एसएसपी अभिषेक सिंह सहित कुल छह पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आला अधिकारियों को पत्र लिखा है। यह मामला नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े एक आरोपी की जब्त धनराशि से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला?
मुजफ्फरनगर कोर्ट में नशीले पदार्थों की तस्करी के आरोपी शाजेब ने एक प्रार्थना पत्र दायर किया था। इसमें उसने पुलिस द्वारा जब्त किए गए 15.40 लाख रुपये को रिलीज करने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए।
अदालत ने क्यों दिखाया कड़ा रुख?
आरोप है कि पुलिस ने जब्त की गई इस बड़ी रकम के संबंध में कोर्ट के निर्देशों का सही ढंग से पालन नहीं किया और न ही साक्ष्यों को ठीक तरह से पेश किया गया। कोर्ट ने आरोपी के पैसे रिलीज करने की अर्जी को तो खारिज कर दिया, लेकिन पुलिस अधिकारियों की लापरवाही को लेकर सख्त टिप्पणी की।
- आला अधिकारियों को जांच के लिए पत्र भेजा गया है।
- तत्कालीन एसएसपी अभिषेक सिंह सहित अन्य पर कार्रवाई की तलवार।
- जब्त माल के निपटारे में लापरवाही बरतने का आरोप।
मायने और प्रभाव
इस घटना के बाद सहारनपुर और मुजफ्फरनगर पुलिस महकमे में हलचल मची हुई है। आम जनता के बीच यह संदेश गया है कि यदि पुलिस की जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं होगी, तो न्यायपालिका किसी भी स्तर पर चूक बर्दाश्त नहीं करेगी। वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट का यह रुख भविष्य में पुलिस की जवाबदेही तय करने के लिए एक नजीर बन सकता है। अब देखना यह होगा कि विभागीय स्तर पर इन छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्या ठोस कार्रवाई की जाती है।




