अगर आप कानपुर या उत्तर प्रदेश के आसपास के इलाकों में रहते हैं, तो आपने पिछले 24 घंटों में बादलों का वो रौद्र रूप जरूर देखा होगा जिसने पिछले चार दशकों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। रविवार रात से शुरू हुआ बारिश का सिलसिला सोमवार तक जारी रहा, जिससे शहर की सड़कें पानी से लबालब हो गईं और लोगों को उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिली है।
40 साल बाद ऐसा नजारा
मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में कानपुर में 77 मिमी बारिश दर्ज की गई है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 20 जुलाई को अधिकतम तापमान गिरकर 24.4 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। ऐसा नजारा साल 1986 के बाद पहली बार देखने को मिला है, जब 20 जुलाई को पारा इतना नीचे गिरा हो।
क्यों हो रही है इतनी जोरदार बारिश?
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और मानसूनी द्रोणी (Monsoon Trough) का तराई क्षेत्र से होकर कानपुर के करीब आना इस बारिश का मुख्य कारण है। यही वजह है कि पिछले दो दिनों से सूरज के दर्शन दुर्लभ हो गए हैं और ‘सन शाइन आवर’ शून्य रिकॉर्ड किए गए हैं।
- 24 घंटे में कुल वर्षा: 77 मिमी
- जुलाई का कोटा: अब तक औसत बारिश का 90.54% पानी गिर चुका है।
- तापमान में गिरावट: सामान्य से 7.6 डिग्री कम दर्ज किया गया अधिकतम तापमान।
अभी और बरसेगा पानी
मौसम विभाग ने राहत की सांस लेने के साथ ही सतर्क रहने की भी चेतावनी दी है। अगले दो दिनों तक मध्यम से तेज बारिश का दौर जारी रहने का पूर्वानुमान है। वातावरण में नमी का स्तर 98 प्रतिशत तक बना हुआ है, जिससे उमस और बारिश का मिला-जुला असर महसूस किया जा सकता है।
मायने और प्रभाव: आम जनता पर क्या असर?
इस मूसलाधार बारिश का सीधा असर जनजीवन और खेती दोनों पर पड़ता है। जहां एक ओर तापमान में इतनी भारी गिरावट ने बिजली की खपत कम की है और लोगों को भीषण गर्मी से राहत दी है, वहीं निचले इलाकों में जलभराव की समस्या बढ़ सकती है। किसानों के लिए यह मानसूनी बारिश खरीफ फसलों के लिहाज से तो फायदेमंद है, लेकिन सतर्कता जरूरी है क्योंकि आने वाले 48 घंटे अभी और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। प्रशासन को जल निकासी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत है ताकि आम लोगों को आवागमन में दिक्कत न हो।




