उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था को सुधारने के लिए चलाए गए विशेष अभियान का असर अब जमीन पर साफ दिखने लगा है। बिजली निगमों के लिए दशकों से सिरदर्द बनी ‘लाइन लॉस’ की समस्या में न केवल कमी आई है, बल्कि राजस्व वसूली के आंकड़ों ने भी विभाग के हौसले बुलंद कर दिए हैं।
372 फीडरों पर चला ‘सख्त एक्शन’
राज्य भर में बिजली विभाग ने उन 372 फीडरों को चिन्हित किया था, जहां बिजली चोरी और बिल भुगतान न होने की शिकायतें सबसे ज्यादा थीं। इन इलाकों में सघन चेकिंग अभियान चलाकर बकायेदारों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इसका नतीजा यह रहा कि लंबे समय से अटके पड़े बिजली बिलों के रूप में विभाग ने 614.86 करोड़ रुपये की बड़ी राशि वसूली है।
हर निगम में सुधरे आंकड़े
प्रदेश के सभी पांचों विद्युत वितरण निगमों में लाइन लॉस के प्रतिशत में गिरावट दर्ज की गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक वित्तीय सुधार नहीं है, बल्कि सिस्टम की पारदर्शिता का परिणाम है। स्मार्ट मीटर की बढ़ती पहुंच और नियमित मॉनिटरिंग ने इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है।
- राजस्व में उछाल: 600 करोड़ से अधिक की वसूली से निगमों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
- तकनीकी सुधार: फीडरवार मॉनिटरिंग से बिजली आपूर्ति में भी सुधार की उम्मीद बढ़ी है।
- सख्त रुख: बिजली चोरी रोकने के लिए चलाए गए अभियान से अवैध कनेक्शनों पर लगाम लगी है।
मायने और प्रभाव: आम जनता पर क्या होगा असर?
बिजली विभाग का यह ‘सफल अभियान’ केवल आंकड़ों का खेल नहीं है। जब लाइन लॉस कम होता है, तो इसका सीधा असर बिजली की दरों और आपूर्ति पर पड़ता है। बिजली विभाग के घाटे में कमी आने से भविष्य में दरों को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है। साथ ही, जिन क्षेत्रों में बिजली चोरी कम होगी, वहां ट्रिपिंग की समस्या में कमी आएगी और स्थानीय निवासियों को बेहतर वोल्टेज और निर्बाध बिजली मिलेगी। विभाग की यह कवायद यह संदेश देने के लिए काफी है कि अब बिजली की चोरी और बिलों के प्रति लापरवाही का दौर खत्म हो रहा है।




