उत्तर प्रदेश की राजनीति में जेपीएनआईसी (JPNIC) को लेकर घमासान तेज हो गया है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने जेपीएनआईसी निर्माण के दौरान हुए खर्च और उसमें शामिल लोगों की सूची पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
865 करोड़ के बजट पर उठे सवाल
ओपी राजभर ने सोशल मीडिया पर एक आक्रामक पोस्ट करते हुए सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा किया है। उन्होंने पूछा कि 865 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि में से आखिर कितनी रकम अखिलेश यादव की जेब में गई। राजभर का कहना है कि यह जनता का पैसा है और इसका हिसाब देना सरकार और विपक्ष, दोनों की जवाबदेही है।
परिवारवाद पर भी घेराबंदी
राजभर ने केवल पैसों पर ही नहीं, बल्कि जेपीएनआईसी की संचालन समिति में परिवारवाद को लेकर भी निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस समिति में डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव और सैफई परिवार के अन्य सदस्यों को शामिल करना यह दर्शाता है कि यह केंद्र सरकार की संस्था कम और समाजवादी पार्टी का ‘पारिवारिक प्रोजेक्ट’ ज्यादा था।
- मुख्य आरोप: 865 करोड़ के प्रोजेक्ट में वित्तीय अनियमितता।
- राजनीतिक तंज: संस्था की आड़ में परिवारवाद को बढ़ावा।
- मांग: जनता के पैसे का पूरा हिसाब सार्वजनिक हो।
मायने और प्रभाव
यह बयानबाजी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकती है। जब राज्य में जेपीएनआईसी जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर सवाल उठते हैं, तो इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है जो यह जानना चाहती है कि उनके टैक्स के पैसे का उपयोग विकास के नाम पर हुआ या सिर्फ निजी हितों की पूर्ति के लिए। राजभर का यह हमला अखिलेश यादव की उस छवि को चुनौती देने की कोशिश है, जिसमें वे अक्सर विकास कार्यों का दावा करते रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बड़ी बहस का कारण बन सकता है।


