औरैया जिले में कुदरत का कहर कुछ ऐसा बरपा कि देखते ही देखते 140 से अधिक गांव अंधेरे में डूब गए। बीती रात आई भीषण आंधी और तेज बारिश ने न केवल जन-जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया, बल्कि बिजली विभाग की कमर भी तोड़ दी है।
बिजली तंत्र ध्वस्त, 10 खंभे टूटे
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सहार और दिबियापुर क्षेत्र में तूफानी हवाओं ने भारी तबाही मचाई। हवा की गति इतनी तेज थी कि मुख्य फीडर लाइन के 10 बिजली पोल ताश के पत्तों की तरह उखड़कर गिर गए। इसके चलते घंटों तक इलाके में बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित रही।
लोगों की रातें बनीं मुसीबत
भीषण गर्मी और उमस के बीच घंटों बिजली गुल रहने से आम नागरिकों का बुरा हाल हो गया। बुजुर्गों और बच्चों की परेशानी सबसे अधिक रही, जबकि पेयजल संकट ने भी लोगों को घरों से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पेड़ गिरने और बिजली के तारों के टूटने से स्थिति और भी भयावह हो गई थी।
मायने और प्रभाव: आम जनता पर असर
इस घटना ने प्रशासन की तैयारियों पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके मुख्य प्रभाव और मायने कुछ इस तरह हैं:
- बुनियादी ढांचे की कमजोरी: जर्जर तारों और पुराने खंभों के कारण थोड़ी सी बारिश में ही पूरा सिस्टम फेल हो जाता है।
- आर्थिक नुकसान: बिजली नहीं होने से छोटे व्यापार और खेती से जुड़े कार्य ठप पड़ गए हैं, जिसका सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
- प्रशासनिक लापरवाही: मानसून पूर्व रखरखाव के दावों की पोल इस हादसे ने खोल दी है।
फिलहाल बिजली विभाग की टीमें युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य में जुटी हैं, लेकिन 140 गांवों तक सुचारू रूप से बिजली बहाल होने में समय लग सकता है।



