चलती ट्रेन में लाखों की नकदी का मिलना कोई आम बात नहीं है, लेकिन चित्रकूट के कर्वी रेलवे स्टेशन पर जो हुआ, उसने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। बेतवा एक्सप्रेस में सवार एक बुजुर्ग के बैग से बरामद 63 लाख रुपये ने अब कानपुर से लेकर सतना तक हड़कंप मचा दिया है। यह पैसा किसका है और किस मंशा से ले जाया जा रहा था, इसका जवाब अब आयकर विभाग (Income Tax Department) तलाश रहा है।
क्या है पूरा मामला?
सोमवार को आरपीएफ और क्राइम विंग झांसी की संयुक्त टीम ने बेतवा एक्सप्रेस के बी-3 कोच में चेकिंग अभियान चलाया था। इस दौरान सतना निवासी प्रीतमदास के पास मौजूद बैग से 63 लाख रुपये की भारी नकदी बरामद हुई। जैसे ही सुरक्षाकर्मियों ने इस रकम के बारे में सवाल किए, प्रीतमदास का चेहरा उतर गया। उसके पास न तो कोई वैध दस्तावेज थे और न ही इस मोटी रकम का कोई संतोषजनक हिसाब।
बदलते बयान और संदेह का घेरा
जांच अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी पूछताछ में लगातार अपने बयान बदल रहा है। कभी वह सतना के ‘संजय’ को सब्जी व्यापारी बताता है, तो कभी किराना व्यवसायी। इस लुका-छिपी ने सुरक्षा एजेंसियों के शक को और गहरा कर दिया है। अब सारी उम्मीदें आरोपी के मोबाइल फोन पर टिकी हैं। पुलिस और आयकर विभाग को भरोसा है कि उस फोन की कॉल डिटेल्स और चैट से उन असली चेहरों तक पहुंचा जा सकेगा, जो इस पूरे नेटवर्क को चला रहे हैं।
मायने और प्रभाव: आम जनता पर क्या असर?
यह मामला महज एक बरामदगी नहीं, बल्कि संगठित अपराध और टैक्स चोरी के एक बड़े पैटर्न की ओर इशारा करता है। इसके पीछे छिपे खतरे इस प्रकार हैं:
- हवाला का जाल: सतना और कानपुर के बीच का यह रूट अक्सर अवैध लेन-देन के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। बुजुर्गों को मामूली रकम का लालच देकर करियर (Courier) की तरह इस्तेमाल करना तस्करों का पुराना हथकंडा है।
- टैक्स चोरी: बड़े व्यापारी अपनी कमाई को बैंक की नजरों से बचाने के लिए अक्सर ‘कैश रूट’ का सहारा लेते हैं। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान होता है।
- आईटी नियमों की सख्ती: आयकर विभाग के सख्त नियमों के अनुसार, 50 हजार से अधिक की बिना सोर्स वाली नकदी मिलने पर पूरी राशि जब्त की जा सकती है और 200 प्रतिशत तक जुर्माना भी लग सकता है।
फिलहाल, आयकर विभाग ने प्रीतमदास को समन जारी कर दिया है। यदि यह पैसा हवाला से जुड़ा पाया गया, तो मामला केवल टैक्स चोरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बड़ी आपराधिक धाराओं में प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज की जाएगी। कानपुर और सतना के कारोबारी जगत में इस कार्रवाई के बाद से हड़कंप मचा हुआ है, क्योंकि अब मोबाइल के डेटा से उन बड़े खिलाड़ियों के नाम सामने आ सकते हैं जो पर्दे के पीछे से इस खेल को नियंत्रित कर रहे थे।

