शास्त्रीनगर में सुबह सवेरे चला बुलडोजर
मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में बुधवार की सुबह एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली जिसने पूरे इलाके में हलचल मचा दी। प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में उन अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चला दिया, जो लंबे समय से विवादों में थे। सुबह छह बजे से ही पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया था और बैरिकेडिंग के जरिए रास्तों को सील कर दिया गया था।
क्या था पूरा मामला?
आवास विकास परिषद की यह कार्रवाई उन छह भवनों पर हुई जिन्हें पहले ही सील किया जा चुका था। इन संपत्तियों में एक बड़ा बैंक्वेट हॉल और पांच कॉम्प्लेक्स शामिल थे, जिनमें करीब 35 दुकानें चल रही थीं। अधिकारियों का साफ कहना है कि ये सभी निर्माण बिना स्वीकृत नक्शे के खड़े किए गए थे, जो नियमों का खुला उल्लंघन था।
ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया सुबह सवा सात बजे शुरू हुई। कार्रवाई के दौरान बिजली आपूर्ति काट दी गई और स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। विरोध के सुर भी उठे, लेकिन प्रशासन ने किसी की एक न सुनी और सुप्रीम कोर्ट में होने वाली आगामी 21 सितंबर की सुनवाई से पहले अपना पक्ष मजबूत करने के लिए यह कदम उठा लिया।

व्यापारियों का विरोध और अधिकारियों से बातचीत
कार्रवाई के दौरान ‘मेरठ बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति’ और किसान यूनियन के प्रतिनिधियों ने मौके पर पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराया। हालांकि, एडीएम सिटी और एसपी सिटी की मौजूदगी में उन्हें बातचीत के जरिए शांत करने की कोशिश की गई। जब बड़ी मशीनों के जरिए तोड़फोड़ शुरू हुई, तो बाजार के दुकानदारों में हड़कंप मच गया और वे बेबस होकर अपनी आंखों के सामने अपना कारोबार ढहता देखते रहे।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्या संदेश है?
- नियमों की अहमियत: यह घटना उन सभी लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो बिना नक्शा पास कराए या गलत तरीके से कमर्शियल निर्माण कर रहे हैं।
- प्रशासनिक सख्ती: सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में प्रशासन अब किसी भी दबाव या विरोध के आगे झुकने के मूड में नहीं दिख रहा है।
- आर्थिक नुकसान: 35 दुकानों और बैंक्वेट हॉल के जमींदोज होने से न केवल व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है, बल्कि बाजार की पूरी अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ेगा।
- भविष्य की आहट: यदि आपके पास भी संपत्तियों से जुड़े वैध कागजात नहीं हैं, तो यह समय अपनी संपत्ति को कानूनी दायरे में लाने का है, अन्यथा बुलडोजर का डर बना रहेगा।



