मुजफ्फरनगर के बड़ौत मार्ग पर भैसाना गांव के पास जो हुआ, उसने हर किसी का कलेजा कंपा दिया है। तेज रफ्तार रोडवेज बस के चालक की एक गलती और एक गलत ओवरटेक ने पांच लोगों की जिंदगी सड़क पर ही खत्म कर दी। खून से सना बड़ौत रोड इस बात की गवाही दे रहा है कि सड़कों पर बेकाबू रफ्तार किस तरह कहर बनकर टूटती है।
क्या हुआ था बड़ौत रोड पर?
हादसा उस वक्त हुआ जब रोडवेज बस चालक ने ओवरटेक करने की जल्दबाजी दिखाई। इसी हड़बड़ाहट में बस ने सड़क से गुजर रही दो बाइकों को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइकों पर सवार लोग संभलने का मौका भी नहीं पा सके।
इस हादसे में बागपत के फरमान, उनकी मासूम तीन साल की बेटी सुहाना और बहनोई बुढ़ाना निवासी मोमीन की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, दूसरी बाइक पर सवार शामली के कांधला निवासी चचेरे भाई साजिद और इदरीश ने भी अस्पताल ले जाने से पहले ही दम तोड़ दिया।
प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। बस चालक को हिरासत में ले लिया गया है और मामले की गहनता से जांच की जा रही है। चश्मदीदों के मुताबिक, चालक काफी देर से लापरवाही से बस चला रहा था, जो अंत में एक बड़े हादसे की वजह बनी।
मायने और प्रभाव: आम आदमी को क्या समझना चाहिए?
यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि हमारी सड़कों पर फैली ‘रफ्तार की बीमारी’ का नतीजा है। मुजफ्फरनगर जैसे व्यस्त शहरों में रोडवेज और प्राइवेट बसों की मनमानी लगातार बढ़ रही है।
- दबाव और लापरवाही: सरकारी बसों के ड्राइवरों पर समय पर पहुंचने का दबाव होता है, लेकिन क्या किसी की जान से ज्यादा समय कीमती है?
- सुरक्षा के सवाल: बड़ौत रोड जैसे मार्गों पर भारी वाहनों की बेतहाशा रफ्तार को रोकने के लिए प्रशासन को कड़े कदम उठाने की जरूरत है।
- जागरूकता: बाइक चालकों को भी हाईवे पर सावधानी बरतनी चाहिए, लेकिन भारी वाहनों के चालक की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है क्योंकि वे खुद एक बड़े खतरे का हिस्सा होते हैं।
इस हादसे ने पांच परिवारों के चिराग बुझा दिए हैं। अब जरूरत है कि परिवहन विभाग सख्त नियम लागू करे ताकि बड़ौत रोड दोबारा ऐसी दर्दनाक तस्वीरों का गवाह न बने।






