मुजफ्फरनगर के राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में उमड़ा किसानों का जनसैलाब आज एक बार फिर सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर गया। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेता राकेश टिकैत ने मंच से सीधा ऐलान किया कि सरकार का ध्यान विकास से भटककर सिर्फ ‘मस्जिद और मदरसों’ पर टिक गया है।
सहारनपुर घटना पर बरसे टिकैत
सहारनपुर में हाल ही में हुई मस्जिद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई ने महापंचायत में मुख्य मुद्दा ले लिया। राकेश टिकैत ने इसे प्रशासन की एक सोची-समझी साजिश करार दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कोर्ट के आदेश का बहाना बनाकर अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है, जिसे किसान बर्दाश्त नहीं करेंगे।
रामपुर यूनिवर्सिटी को लेकर चेताया
टिकैत ने रामपुर में जौहर यूनिवर्सिटी के मुद्दे का जिक्र करते हुए सरकार को सीधी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, ‘हम रामपुर की यूनिवर्सिटी को टूटने नहीं देंगे। सरकार को शिक्षा और रोजगार की बात करनी चाहिए, न कि बुलडोजर संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए।’
मायने और प्रभाव: आम जनता पर क्या असर?
यह महापंचायत केवल किसानों के मुद्दों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें राजनीतिक और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पर भी कड़ा प्रहार किया गया। इसका सीधा प्रभाव उत्तर प्रदेश की राजनीति पर पड़ सकता है:
- राजनीतिक ध्रुवीकरण: किसान और अल्पसंख्यक एकजुट होकर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं।
- बुलडोजर नीति पर सवाल: धार्मिक स्थलों को तोड़े जाने से उपजे रोष ने सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
- आंदोलन की नई दिशा: टिकैत का यह रुख दर्शाता है कि आने वाले दिनों में भाकियू केवल कृषि कानूनों तक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर भी मुखर होकर लड़ेगी।
कुल मिलाकर, मुजफ्फरनगर की इस महापंचायत ने साफ कर दिया है कि पश्चिम उत्तर प्रदेश का किसान अब चुप बैठने वाला नहीं है। सरकारी तंत्र को अब जनता के सवालों का जवाब देना ही होगा।



