पीलीभीत में लोकतंत्र की नींव यानी ‘मतदाता सूची’ के साथ छेड़छाड़ का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता से खिलवाड़ के आरोपों के बाद अब जिला प्रशासन ने बड़ा एक्शन लेते हुए 150 बूथों की गहन पड़ताल शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
अमरिया तहसील के अंतर्गत आने वाले 150 मतदान केंद्रों पर फर्जीवाड़े की शिकायतें मिलने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। आरोप है कि मतदाता सूची में बिना सत्यापन के नाम जोड़े और हटाए गए हैं। इस पूरे खेल में पांच सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (AERO) की भूमिका संदेह के घेरे में है।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई
जिला निर्वाचन अधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अब केवल अमरिया ही नहीं, बल्कि जिले की सभी विधानसभा सीटों पर मतदाता सूचियों की ‘क्रॉस चेकिंग’ के आदेश दिए हैं। टीम यह पता लगा रही है कि नियमों को ताक पर रखकर आखिर किसके इशारे पर ये बदलाव किए गए थे।
- 150 बूथों का डेटा खंगाला जा रहा है।
- 5 AERO की भूमिका की विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी गई है।
- भविष्य में ऐसी चूक रोकने के लिए विशेष निगरानी दल का गठन।
मायने और प्रभाव
इस फर्जीवाड़े की जांच का सीधा असर स्थानीय राजनीति पर पड़ना तय है। मतदाता सूची में हेरफेर सीधे तौर पर चुनाव के नतीजों को प्रभावित करती है, जो आम नागरिक के वोट के अधिकार का हनन है। यदि जांच में अधिकारी दोषी पाए जाते हैं, तो यह न केवल उनके करियर के लिए अंत होगा, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में भी एक बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। आम जनता के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि चुनावी पारदर्शिता के साथ समझौता करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।




