मुजफ्फरनगर के राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में एक बार फिर किसानों का हुजूम उमड़ा। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) द्वारा बुलाई गई इस महापंचायत में ट्रैक्टरों का सैलाब और किसानों का जोश साफ बयां कर रहा था कि आने वाले दिनों में कृषि आंदोलन की राह चुनौतीपूर्ण होने वाली है। सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते हुए किसानों ने गन्ने के दाम को लेकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
गन्ने का दाम 500 रुपये प्रति क्विंटल की मांग
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत और अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत की मौजूदगी में हुई इस पंचायत में सबसे प्रमुख मुद्दा गन्ने के दाम का रहा। संगठन ने मांग की है कि आगामी पेराई सत्र में गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल तय किया जाए। इसके साथ ही, लंबित गन्ना भुगतान को ब्याज सहित तुरंत जारी करने पर जोर दिया गया।
16 सूत्रीय मांगों का चार्टर
महापंचायत के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपे गए। किसानों ने अपनी 16 प्रमुख मांगों को दोहराते हुए सरकार से तत्काल समाधान की उम्मीद जताई है। इनमें से कुछ प्रमुख मांगें नीचे दी गई हैं:
- एमएसपी की कानूनी गारंटी: स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर फसलों की एमएसपी पर खरीद का कानून।
- बिजली पर राहत: कृषि के लिए मुफ्त बिजली और घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट तक फ्री बिजली।
- स्मार्ट मीटर का विरोध: बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया और स्मार्ट मीटर व्यवस्था को तत्काल वापस लेने की मांग।
- ऋण माफी: किसानों और कृषि मजदूरों का पूरा कर्ज माफ किया जाए और ब्याज मुक्त ऋण मिले।
- बुलडोजर कार्रवाई पर रोक: ग्रामीण परिवारों के पुनर्वास के बिना किसी भी तरह की बेदखली या बुलडोजर कार्रवाई न हो।
मायने और प्रभाव
इस महापंचायत के मायने सिर्फ मुजफ्फरनगर तक सीमित नहीं हैं। भाकियू ने पूरे प्रदेश में सिलसिलेवार पंचायतें करने का ऐलान कर दिया है, जिससे साफ है कि वे आने वाले समय में एक बड़े जन आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। गन्ने का मूल्य उत्तर प्रदेश की राजनीति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी है। यदि सरकार इन मांगों पर जल्द कोई ठोस नीति नहीं बनाती है, तो यह आंदोलन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में भी विकराल रूप ले सकता है। किसानों का संगठित होना और स्मार्ट मीटर से लेकर उर्वरकों की सब्सिडी तक के मुद्दों को उठाना यह दर्शाता है कि ग्रामीण इलाकों में नाराजगी गहराती जा रही है।




