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मां का आंचल या दादी की गोद: दुर्लभ बीमारी से जूझ रहा मासूम किसके पास रहेगा, जानें कोर्ट ने क्या सुनाया फैसला

एक मासूम बच्चा, जो जिंदगी की जंग एक दुर्लभ बीमारी से लड़ रहा है, उसके लिए घर की सुरक्षा और देखभाल सबसे ज्यादा मायने रखती है। आगरा के परिवार न्यायालय ने हाल ही में एक ऐसे ही भावनात्मक मामले में फैसला सुनाया है, जहां मां और दादी के बीच बच्चे की कस्टडी को लेकर लंबा कानूनी संघर्ष चला। अदालत ने सभी पहलुओं को परखने के बाद बच्चे की सुपुर्दगी उसकी दादी को सौंपने का आदेश दिया है।

क्या है पूरा मामला?

आगरा के इस मामले में सात साल का एक बच्चा गंभीर और दुर्लभ बीमारी का शिकार है। इस स्थिति में उसे 24 घंटे चिकित्सा देखभाल और विशेष ध्यान की जरूरत होती है। अदालत में सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि बच्चे के इलाज और दैनिक दिनचर्या के लिए घर में एक स्थिर माहौल बेहद जरूरी है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जज ने न केवल कानूनी पहलुओं को देखा, बल्कि बच्चे के बेहतर भविष्य और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी। अदालत ने माना कि फिलहाल बच्चे के शारीरिक स्वास्थ्य और उसकी मेडिकल जरूरतों को दादी बेहतर तरीके से संभाल सकती हैं।

मां को मिली मिलने की छूट

अदालत ने फैसले को मानवीय आधार पर संतुलित रखा है। दादी को बच्चे की मुख्य कस्टडी दी गई है, लेकिन मां के अधिकारों को भी सुरक्षित रखा गया है। आदेश के तहत, मां को महीने में एक बार बच्चे से मिलने की अनुमति दी गई है। यह मुलाकात तय समय पर और बच्चे के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ही होगी।

मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्या संदेश है?

  • स्वास्थ्य प्राथमिकता: इस फैसले ने साफ कर दिया है कि पारिवारिक विवादों में अदालत का झुकाव उस पक्ष की ओर होगा जो बच्चे की मेडिकल और दैनिक जरूरतों को प्राथमिकता दे सके।
  • भावनात्मक बनाम व्यावहारिक: कस्टडी के मामलों में केवल भावनात्मक लगाव काफी नहीं होता, बल्कि बच्चे की विशेष जरूरतों को पूरा करने की क्षमता भी एक अहम मानदंड बन गई है।
  • संतुलित न्याय: कोर्ट ने कस्टडी दादी को देकर बच्चे के स्थायित्व को सुनिश्चित किया है, वहीं मां को मिलने का अधिकार देकर पारिवारिक संबंधों को पूरी तरह खत्म होने से बचाया है।

यह मामला उन सभी परिवारों के लिए एक सीख है जो बच्चों के भविष्य को लेकर किसी कानूनी लड़ाई में उलझे हैं। कोर्ट का रुख स्पष्ट है—कानून की नजर में बच्चे का ‘सर्वोत्तम हित’ ही सबसे बड़ा कानून है।

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