महोबा के खन्ना इलाके में मंगलवार की रात कुदरत का ऐसा कहर बरपा कि आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। तेज आंधी और बारिश के चलते बिजली विभाग का 33 केवी का मुख्य बॉक्स फुंक गया, जिसके बाद 24 गांव अंधेरे की चपेट में आ गए। भीषण उमस और गर्मी के बीच ग्रामीणों की रात करवटें बदलते गुजरी।
क्या हुआ था उस रात?
मंगलवार देर रात अचानक मौसम ने करवट बदली और तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। इसी दौरान चिचारा पावर हाउस में तकनीकी खराबी के चलते 33 केवी का बॉक्स बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस बड़े फाल्ट के कारण खन्ना, बरभौली, बहिंगा, सिरसी खुर्द, गुढ़ा और रतवा समेत करीब 24 से ज्यादा गांव पूरी तरह से ब्लैकआउट हो गए।
बिजली गुल, ग्रामीणों का हाल बेहाल
बिजली न होने के कारण सिर्फ घरों में ही अंधेरा नहीं पसरा, बल्कि भीषण गर्मी में लोगों का जीना मुहाल हो गया। लोग घरों से बाहर निकलकर खुले आसमान और खेतों में रात बिताने को मजबूर हुए। स्थिति इतनी गंभीर थी कि पेयजल आपूर्ति भी ठप हो गई, जिससे ग्रामीणों को पानी के लिए दूर-दराज के इलाकों में भटकना पड़ा।

मायने और प्रभाव: सिस्टम की कमजोरी का आईना
यह घटना केवल एक तकनीकी फाल्ट नहीं है, बल्कि बुनियादी ढांचे की मजबूती पर बड़े सवाल खड़े करती है। इसके मुख्य प्रभाव निम्नलिखित हैं:
- सिस्टम की लचर स्थिति: महज एक आंधी से 24 गांवों की बिजली 12 घंटे तक बंद रहना बताता है कि मेंटेनेंस के दावे कितने खोखले हैं।
- पेयजल का संकट: बिजली जाने के साथ ही मोटरें बंद हो गईं, जिससे ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति ठप हो गई। यह समस्या गर्मी के सीजन में किसी आपदा से कम नहीं है।
- आर्थिक नुकसान: बिजली न होने से छोटे-मोटे ग्रामीण कारोबार और किसानों के सिंचाई कार्य पूरी तरह प्रभावित रहे।
अवर अभियंता संतोष चौधरी ने पुष्टि की है कि बुधवार दोपहर तक आपूर्ति बहाल कर दी गई है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि बिजली विभाग को मानसून आने से पहले उपकरणों की जांच दुरुस्त कर लेनी चाहिए थी ताकि लोगों को ऐसी भीषण गर्मी में अंधेरे और पानी की किल्लत का सामना न करना पड़े।


