जब मछली को ‘शाकाहारी’ बताने लगे मंत्री
उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद का एक बयान इन दिनों सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। सावन के पवित्र महीने में, जब लाखों लोग शुद्ध सात्विक भोजन का पालन कर रहे हैं, मंत्री जी ने मछली को लेकर एक ऐसा तर्क दिया है जिसने सबको हैरान कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
संजय निषाद ने एक जनसभा के दौरान कहा कि अगर मछली को बिना लहसुन और प्याज के बनाया और खाया जाए, तो वह ‘शाकाहारी’ की श्रेणी में आती है। उनके इस दावे ने न केवल आम लोगों के बीच बल्कि राजनीतिक क्षेत्र में भी बहस छेड़ दी है। सावन में खान-पान को लेकर हिंदू समाज की गहरी आस्था जुड़ी होती है, ऐसे में एक जिम्मेदार मंत्री के इस बयान को लेकर सवाल उठने लाजिमी हैं।
‘निषाद समाज का अपमान बर्दाश्त नहीं’
अपने संबोधन में संजय निषाद ने केवल खान-पान पर ही बात नहीं की, बल्कि अपने राजनीतिक रुख को भी स्पष्ट किया। उन्होंने दो टूक कहा कि जो निषाद समाज का सम्मान नहीं करेगा, वह उनके लिए ‘कसाई’ के समान है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी मजबूती के साथ एनडीए (NDA) के साथ बनी रहेगी और गठबंधन धर्म का पालन करेगी।
मायने और प्रभाव: आम जनता पर क्या असर?
यह बयान सिर्फ एक धार्मिक बहस नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक मायने गहरे हैं:
- वोट बैंक की राजनीति: संजय निषाद का यह बयान सीधे तौर पर निषाद समाज की सांस्कृतिक पहचान और उनके पारंपरिक पेशे (मछली पालन) को गर्व के साथ पेश करने की कोशिश है।
- धार्मिक भावनाओं का टकराव: सावन जैसे पवित्र महीने में इस तरह का बयान धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकता है, जिससे भाजपा की छवि पर असर पड़ने की संभावना है।
- गठबंधन में खींचतान: कसाई वाला बयान राजनीतिक गलियारों में बड़े नेताओं के लिए चिंता का विषय बन सकता है, जो आने वाले समय में एनडीए के भीतर तालमेल पर सवाल खड़े कर सकता है।
आम जनता के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और पार्टी के वरिष्ठ नेता इस बयान से खुद को कैसे अलग करते हैं या इसका बचाव करते हैं।

