बांदा जिले में अंधविश्वास की आड़ में एक ऐसी शर्मनाक घटना सामने आई है, जिसने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। एक ओझा ने बीमार बालक को ठीक करने का झांसा दिया और फिर उसे अपनी हवस का शिकार बना लिया। इस घटना के बाद पीड़ित परिवार सदमे में है और इलाके में भारी आक्रोश है।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित बालक के परिजनों ने बताया कि बच्चा कुछ दिनों से बीमार था। इसी बीच गांव के ही एक कथित ओझा ने उसे झाड़-फूंक से ठीक करने का दावा किया। ओझा ने इलाज के बहाने बच्चे को एकांत में बुलाया और उसके साथ कुकर्म जैसी घिनौनी हरकत को अंजाम दिया।
घटना के बाद जब बालक ने घर लौटकर आपबीती परिजनों को सुनाई, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। आनन-फानन में परिवार ने थाने पहुंचकर ओझा के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पॉक्सो एक्ट समेत गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर लिया है।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
पुलिस के अनुसार, आरोपी ओझा फरार है और उसकी तलाश में दबिश दी जा रही है। इलाके के लोगों का कहना है कि आरोपी लंबे समय से खुद को तांत्रिक बताकर लोगों को ठगने और डराने का काम करता था।
- पोक्सो एक्ट: नाबालिग से अपराध होने के कारण सख्त धाराएं लगाई गई हैं।
- आरोपी की तलाश: पुलिस की कई टीमें गांव और आसपास के ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।
मायने और प्रभाव: क्यों सतर्क रहना है जरूरी?
यह घटना केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि अंधविश्वास के प्रति हमारी सामाजिक विफलता का आईना है। आज भी ग्रामीण इलाकों में बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टर के बजाय झाड़-फूंक करने वालों पर भरोसा करना जानलेवा साबित हो रहा है।
प्रभाव: समाज में फैली इस तरह की कुरीतियों के कारण मासूमों की जिंदगी दांव पर लग रही है। अभिभावकों के लिए यह एक बड़ी सीख है कि वे बच्चों की सेहत को लेकर ओझा-गुनियों के चक्कर में न पड़ें और हमेशा योग्य चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह लें। कानून अपना काम कर रहा है, लेकिन ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जन-जागरूकता ही एकमात्र समाधान है।




