खेती-किसानी के नाम पर चल रहे एक बड़े खेल का बदायूं पुलिस ने पर्दाफाश किया है। खैरी गांव के पास एक बंद पड़े लॉन में बड़े पैमाने पर नमक और गेरू मिलाकर नकली पोटाश तैयार की जा रही थी, जो सीधे किसानों की जेब और उनकी फसल की सेहत पर डाका डालने का काम कर रही थी।
छापेमारी में मिली बड़ी कामयाबी
पुलिस और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने शनिवार शाम को जब इस जगह पर धावा बोला, तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था। अंदर नकली खाद तैयार करने की बाकायदा फैक्टरी चल रही थी। मौके से 300 कट्टे नकली पोटाश और करीब 100 किलो गेरू बरामद किया गया है।
नौ लोग गिरफ्तार, बड़े रैकेट का शक
पुलिस ने इस धंधे में शामिल नौ आरोपियों को मौके से ही धर दबोचा है। शुरुआती जांच में ये साफ है कि आरोपी नमक को पोटाश जैसा रंग देने के लिए गेरू का इस्तेमाल कर रहे थे और इसे असली बताकर बाजार में खपाने की तैयारी थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह खाद किन-किन इलाकों में भेजी जानी थी।
मायने और प्रभाव: किसानों के लिए क्या है खतरा?
यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि किसानों के लिए एक बड़ी चेतावनी है। इसके प्रभाव कुछ इस तरह हो सकते हैं:
- फसल की बर्बादी: नकली पोटाश डालने से न केवल पैदावार घटेगी, बल्कि मिट्टी की उर्वरक शक्ति भी कम हो जाएगी।
- आर्थिक चपत: किसान महंगी खाद के दाम देकर नकली सामान खरीद रहे हैं, जिससे उन्हें सीधा वित्तीय नुकसान हो रहा है।
- सतर्कता की जरूरत: कृषि विभाग अब पूरे जिले में उर्वरक विक्रेताओं की जांच तेज करने की तैयारी में है ताकि भविष्य में ऐसी मिलावट न हो सके।
हमारी सलाह है कि किसान हमेशा अधिकृत विक्रेताओं से ही खाद खरीदें और किसी भी संदिग्ध पैकिंग को देखते ही स्थानीय कृषि विभाग को सूचित करें।





