प्रयागराज की सड़कों पर निकलना अब किसी चुनौती से कम नहीं है। आए दिन छुट्टा पशुओं की टक्कर और आवारा कुत्तों के काटने से हो रही घटनाएं अब सीधे इलाहाबाद हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुंच गई हैं। अदालत ने इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए प्रदेश सरकार को दो सप्ताह के भीतर उन सभी हॉटस्पॉट्स की सूची सौंपने का आदेश दिया है, जहां इन आवारा जानवरों का खतरा सबसे ज्यादा है।
क्या है मामला और अदालत की सख्ती
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान साफ कर दिया है कि आम जनता की सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित नगर निगमों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे केवल कागजी खानापूर्ति न करें।
कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है कि आखिर इन जानवरों के नियंत्रण के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। साथ ही, अगले दो सप्ताह में खतरनाक इलाकों को चिह्नित कर वहां सुरक्षा और नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम करने को कहा गया है।
प्रशासन को ये काम करने होंगे
- राज्य भर में आवारा कुत्तों और छुट्टा पशुओं वाले संवेदनशील इलाकों की पहचान करना।
- पशुओं को रखने के लिए शेल्टर होम की व्यवस्था और उनकी क्षमता में वृद्धि करना।
- आवारा कुत्तों के नसबंदी और टीकाकरण कार्यक्रम में तेजी लाना।
- सार्वजनिक स्थानों पर जानवरों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाना।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्यों जरूरी है यह फैसला
यह आदेश केवल एक कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए राहत की किरण है जिन्होंने सड़कों पर इन जानवरों के कारण अपने प्रियजनों को खोया है या गंभीर चोटें झेली हैं।
1. सुरक्षा का अधिकार: आम नागरिक का सड़कों पर सुरक्षित चलना मौलिक अधिकारों के दायरे में आता है। हाईकोर्ट का यह हस्तक्षेप प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए मजबूर करेगा।
2. जवाबदेही तय होगी: अब तक छुट्टा पशुओं की समस्या पर अक्सर अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे हैं। इस आदेश के बाद स्थानीय निकायों को हर हाल में जवाब देना होगा।
3. शहरी जीवन में सुधार: सड़कों से इन जानवरों का प्रबंधन न केवल हादसों को कम करेगा, बल्कि शहरों में स्वच्छता और शांतिपूर्ण आवाजाही को भी बहाल करने में मदद मिलेगी।
