भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा दखल
मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर जारी कानूनी लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि परिसर के भीतर नहीं, बल्कि मुस्लिम समुदाय को नमाज अदा करने के लिए पास ही में कोई वैकल्पिक जगह मुहैया कराई जानी चाहिए।
यह फैसला उस याचिका पर आया है जिसमें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को भोजशाला का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने और रिपोर्ट सौंपने को कहा गया था।
क्या है पूरा मामला?
धार की भोजशाला को हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष अपने-अपने धार्मिक स्थल के रूप में देखते हैं। लंबे समय से चल रहे इस विवाद में हाई कोर्ट ने ASI को खुदाई और सर्वे के जरिए परिसर की वास्तविकता का पता लगाने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के सर्वे वाले आदेश पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने को कहा है कि सर्वे के दौरान किसी भी पक्ष की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे।
नमाज को लेकर निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक सर्वे चल रहा है और अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक मुस्लिम समुदाय को नमाज के लिए किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि वे परिसर के आसपास नमाज के लिए उचित स्थान सुनिश्चित करें।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्यों है जरूरी?
- सांप्रदायिक सौहार्द: सुप्रीम कोर्ट का यह रुख शांति बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। अलग जगह देने से दोनों पक्षों के बीच सीधे टकराव की संभावना कम हो जाती है।
- कानूनी प्रक्रिया: यह आदेश साबित करता है कि अदालती कार्यवाही और धार्मिक अधिकार साथ-साथ चल सकते हैं, बशर्ते प्रशासन संवेदनशील रहे।
- इतिहास का सच: ASI का सर्वे इस दशकों पुराने विवाद को हमेशा के लिए सुलझाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे धार और आसपास के इलाकों में शांति का स्थायी रास्ता खुल सकता है।


