त्योहारों की दस्तक के साथ ही घर वापसी की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, लेकिन गोरखपुर रेलवे स्टेशन से चलने वाली ट्रेनों की स्थिति देखकर यात्रियों के माथे पर पसीने छूट रहे हैं। दीपावली और छठ पूजा के लिए घर जाने की उम्मीद पाले बैठे लाखों यात्रियों के सामने अब बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
ट्रेनों का हाल: नो-सीट का बोर्ड
अगर आप दिल्ली, मुंबई या पुणे से गोरखपुर आने का प्लान बना रहे हैं, तो जान लीजिए कि आपकी यात्रा आसान नहीं होने वाली है। गोरखधाम, वैशाली, सप्तक्रांति, गोरखपुर-एलटीटी और कुशीनगर एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनों में 15 नवंबर तक पैर रखने की जगह नहीं है। स्लीपर से लेकर थर्ड एसी तक, सभी क्लास में ‘वेटिंग लिस्ट’ लंबी होती जा रही है।
क्यों मची है अफरा-तफरी?
- सीमित संसाधन: हर साल त्योहारों पर यात्रियों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है, लेकिन ट्रेनों की संख्या वही पुरानी है।
- अत्यधिक मांग: छठ पूजा पूर्वांचल का सबसे बड़ा पर्व है, जिसके लिए मुंबई और दिल्ली से लोग बड़ी संख्या में अपने गांव लौटते हैं।
- ब्लैक मार्केटिंग का डर: सीटों के अभाव में दलाल सक्रिय हो जाते हैं, जिससे गरीब यात्रियों की जेब पर दोहरा बोझ पड़ता है।
मायने और प्रभाव
यह स्थिति सिर्फ टिकट न मिलने की समस्या नहीं है, बल्कि यह बुनियादी ढांचों की कमी को दर्शाती है। जब लाखों लोगों का तांता एक साथ घर की ओर मुड़ता है, तो रेलवे का पूरा सिस्टम चरमरा जाता है। इसका सीधा असर मध्यमवर्गीय परिवार के बजट पर पड़ता है, जिन्हें अब मजबूरी में हवाई जहाज के महंगे टिकट लेने पड़ रहे हैं या निजी बसों का सहारा लेना पड़ रहा है। सरकार और रेलवे प्रशासन को इस पीक सीजन के दौरान अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन पर और अधिक ध्यान देने की जरूरत है, ताकि त्योहारों की खुशियां सफर के तनाव में न बदल जाएं।





