दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर मौत का तांडव
राजस्थान के दौसा जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हरिद्वार से इंदौर जा रही एक यात्री बस ने ट्रेलर को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बस के परखच्चे उड़ गए और देखते ही देखते पूरी बस आग के गोले में तब्दील हो गई। इस हादसे में 8 यात्रियों की जलकर दर्दनाक मौत हो गई है।
इमरजेंसी गेट न खुलने से बढ़ी तबाही
हादसे के समय बस में करीब 40 यात्री सवार थे, जो गहरी नींद में थे। चश्मदीदों के मुताबिक, टक्कर के बाद बस में आग लग गई और यात्री जान बचाने के लिए बुरी तरह छटपटाने लगे। आरोप है कि बस का इमरजेंसी गेट नहीं खुला, जिससे अंदर फंसे लोगों को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला। चीख-पुकार का मंजर इतना खौफनाक था कि आसपास के लोग भी सहम गए।
DNA टेस्ट से होगी पहचान
आग की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि शव पूरी तरह से झुलस चुके हैं। स्थानीय प्रशासन और फॉरेंसिक टीम के लिए मृतकों की पहचान करना एक बड़ी चुनौती बन गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब मृतकों की पहचान के लिए DNA टेस्ट का सहारा लिया जाएगा, ताकि परिजनों को उनके शव सौंपे जा सकें।

सामान के साथ जोखिम का दावा
घटना के बाद एक बड़ा खुलासा हुआ है कि बस की डिक्की में भारी मात्रा में ज्वलनशील पदार्थ या सामान भरा हुआ था। माना जा रहा है कि टक्कर के बाद इसी सामान ने आग को और अधिक भड़काया, जिससे चंद मिनटों में ही बस एक भट्टी की तरह जल उठी। प्रशासन ने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
मायने और प्रभाव
यह हादसा सड़क सुरक्षा पर फिर से बड़े सवाल खड़े करता है:
- सख्त जांच की जरूरत: बसों में ज्वलनशील पदार्थों का परिवहन और सुरक्षा मानकों की अनदेखी सीधे तौर पर यात्रियों की जान से खिलवाड़ है।
- इमरजेंसी प्रोटोकॉल: बस संचालकों के लिए इमरजेंसी गेट का संचालन सुनिश्चित करना अनिवार्य होना चाहिए, ताकि आपात स्थिति में जान बचाई जा सके।
- एक्सप्रेसवे पर गति: देश के नए एक्सप्रेसवे पर हाई स्पीड ड्राइविंग के साथ-साथ कड़े यातायात नियमों का पालन करना अब वक्त की मांग है।


