आगरा की माटी ने आज अपने एक जांबाज सपूत को नम आंखों से विदाई दी। सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवान अभिषेक यादव का पार्थिव शरीर जैसे ही उनके पैतृक गांव बमरौली अहीर पहुंचा, पूरा माहौल गमगीन हो गया। तिरंगे में लिपटे अभिषेक के शव को देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें छलक पड़ीं।
गांव में गूंजे वीर गाथा के नारे
बिहार के सुपौल में ट्रेनिंग के दौरान शहीद हुए अभिषेक यादव के सम्मान में गांव के युवाओं ने एक विशाल तिरंगा यात्रा निकाली। सैकड़ों युवाओं ने ‘अभिषेक यादव अमर रहे’ और ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, अभिषेक तेरा नाम रहेगा’ के नारों के साथ अपने वीर साथी को अंतिम विदाई दी। इस दृश्य ने वहां मौजूद हर किसी के दिल को झकझोर कर रख दिया।
प्रशासन से मांग और अंतिम संस्कार
अंतिम संस्कार से पहले ग्रामीणों ने कुछ महत्वपूर्ण मांगें रखीं। गांव वालों का कहना था कि गांव के मुख्य मार्गों का नाम अभिषेक यादव के नाम पर रखा जाए और वहां एक शहीद स्मारक बनाया जाए। करीब तीन घंटे तक चले गतिरोध और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद, श्मशान घाट के सौंदर्यीकरण और उचित सम्मान के आश्वासन पर अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।
- कौन थे अभिषेक यादव: एसएसबी के बहादुर जवान, जो अपनी ट्रेनिंग के दौरान देश सेवा के रास्ते पर शहीद हुए।
- अंतिम विदाई का स्थान: बमरौली अहीर, आगरा।
- अंतिम संस्कार: छोटे भाई सुमित यादव ने दी मुखाग्नि।
मायने और प्रभाव
इस घटना ने एक बार फिर से सीमा सुरक्षा बलों में कार्यरत हमारे जवानों के प्रति समाज की संवेदनशीलता को दर्शाया है। एक जवान की शहादत न केवल उसके परिवार का नुकसान है, बल्कि पूरे समाज की क्षति है। आगरा के ग्रामीणों द्वारा शहीद के नाम पर मार्ग और स्मारक की मांग करना यह दिखाता है कि नई पीढ़ी अपने नायकों को याद रखना चाहती है। प्रशासन द्वारा इस मामले में त्वरित संज्ञान लेना भविष्य में ऐसे वीर सपूतों के सम्मान के लिए एक मानक स्थापित करेगा।





