महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने समाज के ताने-बाने और भरोसे को तार-तार कर दिया है। चिमूर तहसील के नेरी गांव में रहने वाले पूर्व भाजपा नेता दत्तू पिसे पर एक विधवा महिला को डराने-धमकाने और यौन शोषण के लिए मजबूर करने का गंभीर आरोप लगा है।
तंत्र-मंत्र और वॉइस चेंजर का डरावना खेल
आरोपी ने पीड़िता को अपने जाल में फंसाने के लिए एक बेहद शातिर तरीका अपनाया। उसने खुद को ‘विद्या गोखले’ नाम की एक प्रभावशाली अधिकारी और दैवीय शक्तियों की जानकार महिला बताकर फोन करना शुरू किया। वह वॉइस-मॉड्यूलेशन ऐप का इस्तेमाल कर अपनी आवाज बदलकर महिला को डराता था।
आरोपी का कहना था कि महिला अगर अपने ही पड़ोसी यानी दत्तू पिसे के साथ शारीरिक संबंध नहीं बनाती है, तो उस पर और उसके पूरे परिवार पर दैवीय प्रकोप बरपेगा। विधवा महिला लगातार इस मानसिक दबाव में घुट रही थी।
मृत पति का फोन बना काल
इस साजिश का अंत तब हुआ जब महिला ने अपने दिवंगत पति के मोबाइल की जांच की। उसके पति ने अपने फोन में ‘ऑटो कॉल रिकॉर्डिंग’ की सेटिंग ऑन कर रखी थी। जब पीड़िता ने रिकॉर्डिंग सुनी, तो उसे आवाज में हेरफेर होने के बावजूद बात करने का लहजा और शब्द पहचानने में देर नहीं लगी।
पीड़िता ने तुरंत चिमूर पुलिस स्टेशन पहुंचकर पूरे सबूत पुलिस को सौंप दिए। पुलिस ने इस मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए केस दर्ज किया है। आरोपी दत्तू पिसे, जो पूर्व में भाजपा का तहसील उपाध्यक्ष रह चुका है, फिलहाल गिरफ्तारी के डर से फरार है।
मायने और प्रभाव: समाज के लिए सबक
- तकनीक का दुरुपयोग: यह मामला साफ करता है कि कैसे आज के दौर में वॉइस चेंजर जैसे ऐप्स का इस्तेमाल कर किसी को मानसिक रूप से तोड़ा जा सकता है।
- जागरूकता ही बचाव है: तकनीक का सकारात्मक इस्तेमाल, जैसे कि कॉल रिकॉर्डिंग, कई बार बड़े अपराधों को सामने लाने में मदद करती है।
- सामाजिक असुरक्षा: एक पूर्व जनप्रतिनिधि का ऐसा कृत्य राजनीति में गिरते नैतिक मूल्यों पर बड़े सवाल खड़े करता है।
फिलहाल, पुलिस पूरे क्षेत्र में छापेमारी कर रही है और आरोपी की तलाश जारी है। यह घटना हर उस व्यक्ति के लिए सीख है जो अंधविश्वास और तकनीकी धोखे का शिकार हो रहे हैं।