"रोज नई ऊर्जा, नई सोच के साथ"

ताजा खबर पडरौना कुशीनगर उत्तर प्रदेश राजनीति क्रिकेट स्पोर्ट्स देश विदेश मौसम बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल राशिफल आध्यात्मिक अन्य

सिटी इंस्टीट्यूट

ऑफ पैरामेडिकल कॉलेज

ADMISSION OPEN
DMLT | DPT | ऑपरेशन थियेटर टेक्निशियन
एवं अन्य पैरामेडिकल कोर्स
9984858492

गाली देना अपराध या अभिव्यक्ति पर प्रहार? PM मोदी टिप्पणी विवाद में अभिजीत दीपके का बड़ा सवाल

जंतर-मंतर से उठी एक आवाज अब देशभर में चर्चा का विषय बन गई है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अभिजीत दीपके ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई टिप्पणी पर दर्ज हुई एफआईआर को लेकर तीखे सवाल खड़े किए हैं। दीपके का तर्क है कि भाषा की मर्यादा और आपराधिक कानून के बीच का अंतर धुंधला होता जा रहा है।

क्या देश में कानून सबके लिए बराबर है?

अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर जारी अपने वीडियो में सीधे तौर पर कानून की निष्पक्षता पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि गाली देना निश्चित रूप से सामाजिक रूप से गलत हो सकता है, लेकिन इसे तुरंत आपराधिक अपराध की श्रेणी में लाकर एफआईआर दर्ज करना एक खतरनाक मिसाल है।

उन्होंने साफ लहजे में कहा, “अगर गाली देने पर ही मुकदमे दर्ज होने लगे, तो सबसे पहले बीजेपी के आईटी सेल और कई बड़े नेताओं पर कार्रवाई होनी चाहिए।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इसे कानून का दोहरा मापदंड मानते हैं, जहाँ आम आदमी के लिए नियम सख्त हैं और सत्ताधारी पक्ष के लिए नरम।

रमेश बिधूड़ी से लेकर योगी आदित्यनाथ तक का जिक्र

दीपके ने अपनी बात को पुख्ता करने के लिए अतीत के कई विवादित बयानों को याद दिलाया। उन्होंने संसद में पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी द्वारा दिए गए अपशब्दों का जिक्र करते हुए पूछा कि उस समय कार्रवाई की गति क्या थी?

  • रमेश बिधूड़ी प्रकरण: संसद के भीतर की गई अपमानजनक टिप्पणी।
  • बीजेपी आईटी सेल: सोशल मीडिया पर महिलाओं और विपक्षियों के खिलाफ इस्तेमाल होने वाली भाषा।
  • यूपी सीएम का संदर्भ: सीएम योगी आदित्यनाथ का एक पुराना वीडियो, जिसमें कैमरापर्सन के प्रति कथित तौर पर अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया गया था।

पूरा मामला क्या है? (रुचिका सिंह पर FIR)

यह विवाद 23 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से शुरू हुआ। रुचिका सिंह नामक महिला पर प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का उपयोग करने का आरोप है। गाजियाबाद निवासी स्मृति सिंह की शिकायत पर नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में जीरो एफआईआर दर्ज की गई है।

पुलिस के अनुसार, मामला नई दिल्ली का होने के कारण अब इसे दिल्ली पुलिस को ट्रांसफर किया जा रहा है। उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्या है यह संदेश?

यह मामला महज एक एफआईआर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ (Freedom of Speech) और ‘कानूनी दायरे’ के बीच की महीन लकीर को लेकर बहस छेड़ता है।

आम जनता के लिए इसके दो बड़े मायने हैं:

  • समानता का अधिकार: लोग अब यह सोचने पर मजबूर हैं कि क्या कानून का डर सिर्फ विपक्ष या आम नागरिकों के लिए है।
  • राजनीतिक सहिष्णुता: लोकतंत्र में असहमति दर्ज कराने का सही तरीका क्या होना चाहिए, यह बहस अब सड़कों पर आ गई है। यदि कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिशोध के लिए होगा, तो भविष्य में संवाद की गुंजाइश कम होती जाएगी।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment