कानपुर में साइबर अपराधियों के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। कल्याणपुर के एक संस्था संचालक को बंधक बनाकर करीब 5 करोड़ रुपये की चपत लगाने वाले तीन शातिर बदमाशों को पुलिस ने लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद शहर में हड़कंप मचा हुआ है।
कैसे रची गई साजिश?
पीड़ित आशीष कुमार सिंह ने शिकायत में बताया कि उन्हें संस्था के नाम पर डोनेशन देने के बहाने लखनऊ बुलाया गया था। नवंबर 2025 में जब वे वहां पहुंचे, तो गिरोह ने उन्हें बंधक बना लिया। आरोपियों ने न केवल उनका मोबाइल छीना बल्कि डरा-धमका कर उनके बैंक खाते से 4.98 करोड़ रुपये का अवैध लेनदेन कर लिया।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह ने संस्था के एक्सिस बैंक खाते का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और साइबर अपराधों के लिए किया था। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस एक खाते पर एनसीआरपी पोर्टल पर 54 अलग-अलग साइबर शिकायतें दर्ज थीं। डीसीपी वेस्ट की साइबर सेल ने 4000 पन्नों की रिपोर्ट के आधार पर इस जाल का पीछा किया और आखिरकार लखनऊ से तीन आरोपियों को दबोच लिया।

मायने और प्रभाव
- आम जनता के लिए सीख: अनजान लोगों के झांसे में आकर किसी भी कानूनी दस्तावेज पर दस्तखत करना या उनके बुलाने पर बिना पड़ताल के बाहर जाना कितना खतरनाक हो सकता है, यह घटना उसकी बानगी है।
- साइबर सुरक्षा पर सवाल: बैंकिंग प्रणाली में इतने बड़े पैमाने पर संदिग्ध ट्रांजेक्शन और दर्जनों शिकायतों के बावजूद खाते का सक्रिय रहना बैंक की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है।
- पुलिस की सक्रियता: एनसीआरपी पोर्टल के जरिए की गई इस कार्रवाई ने साबित कर दिया है कि डिजिटल फुटप्रिंट्स के जरिए साइबर अपराधियों को कहीं भी छिपा नहीं रखा जा सकता।
फिलहाल पुलिस चौथे आरोपी की तलाश में जुटी है, जिसकी गिरफ्तारी के बाद इस पूरे रैकेट के तार अन्य राज्यों से भी जुड़ने की संभावना है।



