कानपुर के चर्चित दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड की परतें अब पारिवारिक और आर्थिक विवाद की ओर मुड़ गई हैं। पांच सितंबर को इंदिरानगर में हुई इस खौफनाक हत्या के बाद, अब असली लड़ाई विनीत के 50 करोड़ के साम्राज्य को लेकर शुरू हो गई है। मृतक की पत्नी पुनीता मिनोचा ने अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है ताकि वह कारोबार की बागडोर पूरी तरह संभाल सकें।
जेल में बंद बेटे से ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ की मांग
विनीत की हत्या के मामले में उनके बेटे सुब्रत मिनोचा फिलहाल जेल में बंद हैं। परिवार का आरोप है कि सुब्रत के जेल जाने के बाद से करोड़ों का कारोबार ठप पड़ गया है। बैंक खातों से लेन-देन के लिए सुब्रत और पुनीता दोनों के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं, जो अब संभव नहीं है। कर्मचारियों का वेतन और दवा कंपनियों का भुगतान न हो पाने के कारण पुनीता ने सीजेएम कोर्ट में अर्जी दी है कि सुब्रत को उनके पक्ष में ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ पंजीकृत करने की अनुमति दी जाए।
क्या शालू मिनोचा की वापसी होगी?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ बहू शालू मिनोचा का है। हत्या के बाद शालू को जेल भेजा गया था, लेकिन बाद में पुलिस ने उसे रिहा कर दिया था। अब चर्चा यह है कि शालू अपने बेटे के हक के लिए फिर से सक्रिय हो सकती है। जानकार बताते हैं कि शालू के मायके वाले कानूनी सलाह ले रहे हैं, और जल्द ही कोर्ट में कोई नई अर्जी दाखिल की जा सकती है। यदि ऐसा हुआ, तो सास और बहू के बीच 50 करोड़ के कारोबार पर कब्जे की जंग छिड़ना तय है।

मायने और प्रभाव: क्या है इस विवाद का असली मतलब?
कानपुर के व्यापारिक हलकों में इस खबर की चर्चा जोरों पर है। इस मामले के कुछ गंभीर पहलू हैं:
- कारोबारी संकट: मिनोचा परिवार का दवा कारोबार एक बड़ा नेटवर्क है। कानूनी विवादों के कारण भुगतान रुकने से दवाओं की आपूर्ति पर सीधा असर पड़ रहा है, जो शहर के मरीजों के लिए भी चिंताजनक है।
- पारिवारिक बिखराव: यह केस अब केवल एक मर्डर मिस्ट्री नहीं, बल्कि संपत्ति के लालच और परिवार के टूटने की एक दुखद मिसाल बन गया है।
- कानूनी पेचीदगी: यदि अदालत पुनीता को पावर ऑफ अटॉर्नी देती है, तो यह सुब्रत और शालू के लिए एक बड़ा कानूनी झटका होगा, जो आने वाले समय में नए मुकदमों को जन्म दे सकता है।

