क्या आपने भी हाल ही में किसी अनजान लिंक पर क्लिक किया है? अगर हां, तो सावधान हो जाइए। कानपुर में तैनात आईटीबीपी के एक जवान के साथ हुई साइबर धोखाधड़ी ने सुरक्षा एजेंसियों और आम जनता के कान खड़े कर दिए हैं। एक छोटी सी गलती ने जवान का फोन पूरी तरह हैकर्स के कब्जे में दे दिया और उनके दोस्तों को लाखों का चूना लगाने की कोशिश की गई।
ई-चालान के नाम पर जाल
सरसौल स्थित आईटीबीपी में तैनात रंजीत कुमार राजपूत 29 जुलाई को वाराणसी यात्रा पर थे। इस दौरान उन्हें एक मैसेज मिला जिसमें ई-चालान भरने का लिंक था। रंजीत ने सोचा कि शायद यात्रा के दौरान गाड़ी की स्पीड अधिक होने की वजह से चालान कट गया होगा। जैसे ही उन्होंने उस लिंक पर क्लिक किया, उनका फोन साइबर अपराधियों के रिमोट एक्सेस में चला गया।
कैसे खुला ठगी का राज?
फोन हैक होने के बाद ठगों ने रंजीत की कॉन्टैक्ट लिस्ट का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। हैकर्स ने उनके दोस्तों को व्हाट्सएप पर मैसेज भेजकर इमरजेंसी का बहाना बनाया और दो-दो हजार रुपये की मांग की। कुछ दोस्तों ने तो रंजीत पर भरोसा करते हुए तुरंत रुपये ट्रांसफर भी कर दिए। मामला तब सामने आया जब रंजीत की बेटी ने होमवर्क के लिए मोबाइल उठाया और उसे अजीबोगरीब मैसेजिंग का पता चला।
पुलिस और जांच की स्थिति
- पीड़ित जवान ने साइबर थाने में तत्काल शिकायत दर्ज कराई है।
- महाराजपुर थाना प्रभारी ने पुष्टि की है कि मामले की तकनीकी जांच चल रही है।
- पुलिस उन बैंक खातों को ट्रैक कर रही है जिनमें रुपये ट्रांसफर किए गए थे।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए सबक
यह घटना साबित करती है कि साइबर ठग अब आम नागरिकों के साथ-साथ वर्दीधारियों को भी अपना निशाना बना रहे हैं। ई-चालान, बिजली बिल या सब्सिडी के नाम पर आने वाले किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करना आपकी डिजिटल सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। याद रखें, कोई भी सरकारी विभाग सीधे व्हाट्सएप या एसएमएस पर पेमेंट लिंक नहीं भेजता है। अपनी निजी जानकारी साझा करने से बचें और किसी भी लिंक को खोलने से पहले उसकी आधिकारिक वेबसाइट की जांच जरूर करें।




