कानपुर में शहर के बीचों-बीच स्थित चुन्नीगंज इलाके में एक पुराना नाला धंसने से स्थिति गंभीर हो गई है। इसका सीधा असर एक स्थानीय स्कूल पर पड़ा है, जहां जलभराव के चलते बाउंड्रीवॉल भरभराकर गिर गई। बच्चे और स्थानीय लोग इस मलबे और फैलते गंदे पानी के बीच मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।
क्यों धंसा नाला और क्या है स्थिति?
यह मामला चुन्नीगंज पुलिस चौकी के ठीक पीछे का है, जहां बीते 1 अगस्त को नाला धंसने की घटना हुई थी। नाला धंसने के बाद मलबा जमने से पानी का बहाव रुक गया और अब यह गंदा पानी रिहायशी इलाकों और स्कूल परिसर में भर रहा है। बाउंड्रीवॉल ढहने से स्कूल की सुरक्षा पर भी सवाल उठने लगे हैं।
मौके की नजाकत को देखते हुए महापौर ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ घटनास्थल का दौरा किया। उन्होंने नगर निगम के इंजीनियरों को नाले की सफाई और दीवार के पुनर्निर्माण के लिए तत्काल दिशा-निर्देश दिए हैं।
प्रशासनिक लापरवाही और स्थानीय आक्रोश
- नाले की सफाई समय पर न होना मुख्य वजह मानी जा रही है।
- स्कूल के बच्चों को मलबे और जलभराव के बीच होकर गुजरना पड़ रहा है।
- स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन ने अगर समय रहते सुध ली होती, तो दीवार गिरने की नौबत नहीं आती।
मायने और प्रभाव: आम जनता पर असर
यह घटना केवल एक दीवार गिरने का मामला नहीं है, बल्कि कानपुर की लचर जल निकासी व्यवस्था की पोल खोलती है। मानसून के इस मौसम में यदि समय रहते धंसे हुए नाले को दुरुस्त नहीं किया गया, तो संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
स्कूल की सुरक्षा का मुद्दा सबसे अहम है। प्रशासन की ओर से त्वरित कार्रवाई का आश्वासन तो मिला है, लेकिन सवाल यह है कि क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस ‘ड्रेनेज मास्टर प्लान’ तैयार किया जाएगा? शहर की जनता को अब खोखले वादों के बजाय जमीन पर ठोस समाधान की जरूरत है।




