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कानपुर में गंगा का बढ़ता जलस्तर: 11 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी से कटरी के इलाकों में अलर्ट

कानपुर में गंगा के तेवर हुए तल्ख, प्रशासन अलर्ट

पहाड़ी इलाकों में हो रही लगातार बारिश ने कानपुर की चिंताएं बढ़ा दी हैं। गंगा का जलस्तर सोमवार को एक बार फिर 11 सेंटीमीटर ऊपर चढ़ गया है। बैराज से छोड़े जा रहे पानी की वजह से नदी का बहाव तेज हो गया है, जिससे कटरी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की धड़कनें तेज हो गई हैं।

कहां से आ रहा है इतना पानी?

सिंचाई विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, हरिद्वार और नरोरा बैराज से लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण कानपुर में गंगा का दबाव बढ़ रहा है। इसके अलावा कन्नौज की काली और ईशन नदी, बिठूर की नोन नदी और पांडु नदी का पानी भी गंगा में समा रहा है। इस ‘मल्टी-पॉइंट’ जलभराव के कारण अपस्ट्रीम में पानी तेजी से जमा हो रहा है।

आंकड़ों की जुबानी: सोमवार रात आठ बजे के आंकड़ों के मुताबिक, बैराज के अपस्ट्रीम में जलस्तर 113.04 मीटर और डाउनस्ट्रीम में 112.35 मीटर दर्ज किया गया है। हालांकि अधिकारी कह रहे हैं कि अभी हम चेतावनी बिंदु (Warning Level) से करीब 1.95 मीटर नीचे हैं, लेकिन अगले 48 से 72 घंटों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

घाटों पर लापरवाही, पुलिस सख्त

प्रशासन ने अटल घाट और परमट घाट पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। बढ़ते जलस्तर के कारण घाट की सीढ़ियां पूरी तरह डूब चुकी हैं। सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने रस्सियां बांधकर लोगों के घाट पर जाने पर रोक लगा दी है। बावजूद इसके, कई लोग अपनी जान जोखिम में डालकर घाट के पास जा रहे हैं, जिन्हें पुलिस को चेतावनी देकर खदेड़ना पड़ रहा है।

मायने और प्रभाव: आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?

गंगा का जलस्तर बढ़ना केवल एक तकनीकी रिपोर्ट नहीं है, बल्कि यह कटरी के किसानों और किनारे रहने वाली बस्तियों के लिए सीधे खतरे की घंटी है। इसके गहरे सामाजिक और आर्थिक प्रभाव हो सकते हैं:

  • खेती-किसानी पर असर: कटरी के इलाकों में बोई गई फसलों के डूबने का डर बढ़ गया है, जिससे स्थानीय किसानों को आर्थिक नुकसान हो सकता है।
  • निचले इलाकों में जलभराव: यदि जलस्तर का बढ़ना जारी रहा, तो प्रशासन को इन इलाकों में राहत शिविर लगाने की जरूरत पड़ सकती है।
  • सतर्कता जरूरी: स्थानीय लोगों को सलाह दी जाती है कि वे गंगा के बढ़ते बहाव को हल्के में न लें और घाटों की ओर न जाएं।

आने वाले दो-तीन दिन स्थिति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को 24 घंटे की निगरानी पर रखा है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत बचाव कार्य शुरू किए जा सकें।

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