कानपुर में सरकारी नौकरी की चाहत रखने वाली एक युवती के साथ ऐसा धोखा हुआ कि उसकी मेहनत की कमाई पानी की तरह बह गई। असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का सपना संजोए एक छात्रा से 36.67 लाख रुपये ठग लिए गए। आरोपी ने खुद को यूजीसी (UGC) की गलियारों में पावरफुल बताकर युवती का भरोसा जीता था।
झांसे का जाल: कैसे हुई ठगी?
कल्याणपुर इलाके की रहने वाली स्नेह सोनकर ने दिसंबर 2023 में नेट (NET) की परीक्षा पास की थी। इसी दौरान उनकी मुलाकात पनकी के विमलेश से हुई। विमलेश ने दावा किया कि उसकी यूजीसी में ऊंची पहुंच है और वह स्नेह को पीएचडी कराने के साथ-साथ असिस्टेंट प्रोफेसर की सरकारी नौकरी भी दिला सकता है।
युवती का आरोप है कि आरोपी ने धीरे-धीरे अलग-अलग बहाने बनाकर कुल 36.67 लाख रुपये ऐंठ लिए। इसमें लैपटॉप, ड्रेस, बिजली का बिल, वाहन टैक्स और झांसी केंद्रीय विश्वविद्यालय में दाखिले जैसे तमाम फर्जी खर्चे शामिल थे।

फर्जी दस्तावेजों से बुना विश्वास का खेल
आरोपी ने न सिर्फ रुपये लिए, बल्कि भरोसा कायम रखने के लिए उसे फर्जी प्रमाण पत्र भी थमा दिए। जब कई महीनों तक नौकरी नहीं लगी, तो स्नेह को शक हुआ। उसने जब आरोपी द्वारा दिए गए संपर्क नंबर पर कॉल किया, तो वह नंबर खुद आरोपी का ही निकला, जिससे ठगी का खुलासा हुआ।
धमकी और पुलिस की कार्रवाई
रुपये वापस मांगने पर आरोपी ने सीधे तौर पर जान से मारने की धमकी दी। हार न मानते हुए पीड़िता ने राज्यपाल से गुहार लगाई, जिसके बाद पुलिस आयुक्त कार्यालय के आदेश पर कल्याणपुर थाने में मामला दर्ज किया गया। एसीपी दिलीप कुमार सिंह ने बताया कि पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है।
मायने और प्रभाव
यह घटना उन लाखों युवाओं के लिए एक सबक है जो सरकारी नौकरी के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं। ठग अक्सर आपकी मजबूरी और करियर के दबाव का फायदा उठाते हैं।
- जागरूकता जरूरी: नौकरी के नाम पर आरटीजीएस या कैश लेने वाले किसी भी व्यक्ति पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।
- आधिकारिक चैनल: यूजीसी या किसी भी सरकारी संस्थान में भर्ती की प्रक्रिया पारदर्शी होती है। ऐसी कोई ‘शॉर्टकट’ सेवा नहीं होती जिसके लिए लाखों रुपये लिए जाएं।
- सत्यापन करें: किसी भी दांव-पेच में पड़ने से पहले विश्वविद्यालय या विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से पुष्टि करना ही सुरक्षित रास्ता है।




