कानपुर के जूही सफेद कॉलोनी में मंगलवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब नगर निगम का बुलडोजर एक पार्क को अतिक्रमण मुक्त कराने पहुंचा। पिछले 12 सालों से पार्क की जमीन पर बने 18 अवैध निर्माणों को जमींदोज कर दिया गया, लेकिन इस कार्रवाई ने प्रशासनिक अमले और राजनीतिक दलों के बीच जमकर आग उगली।
12 साल का कब्जा और नगर निगम की सख्त कार्रवाई
नगर निगम उद्यान विभाग के मुताबिक, ब्लॉक 43 और 48 के बीच स्थित इस पार्क पर लंबे समय से स्थानीय लोगों ने पक्के निर्माण कर रखे थे। निगम प्रशासन ने कई बार नोटिस देकर जगह खाली करने की चेतावनी दी थी। 10 जुलाई को जारी आखिरी नोटिस की अनदेखी के बाद आखिरकार मंगलवार को प्रशासन ने भारी पुलिस बल के साथ मौके पर धावा बोल दिया।
सपा नेता और भाजपा पार्षद में हुई तीखी नोकझोंक
कार्यवाही के दौरान माहौल तब तनावपूर्ण हो गया जब सपा नेता सुधांशु मिश्र मौके पर पहुंच गए। उन्होंने कार्रवाई को गलत बताते हुए हंगामा शुरू कर दिया। इसी बीच वहां मौजूद भाजपा पार्षद हरी स्वरूप तिवारी उर्फ निक्कू से उनकी तीखी बहस और गाली-गलौज हुई। नौबत हाथापाई तक पहुंच गई, जिसके बाद पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए सपा नेता को जबरन घसीटकर किदवईनगर थाने पहुंचा दिया।
मायने और प्रभाव
इस पूरी घटना के पीछे की सियासत और प्रशासन का कड़ा रुख कई सवाल खड़े करता है:
- प्रशासनिक सक्रियता: कोर्ट में मामला विचाराधीन होने के दावों के बावजूद नगर निगम की यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे अब बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
- राजनीतिक तनातनी: जिस तरह से पुलिस ने सपा नेता को हिरासत में लिया, वह कानपुर की स्थानीय राजनीति में बढ़ते तनाव को दिखाता है। आने वाले समय में यह मुद्दा सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नई खींचतान की वजह बन सकता है।
- जनहित बनाम राजनीति: पार्क की जमीन खाली होना स्थानीय निवासियों के लिए राहत की बात है, लेकिन राजनीतिक हंगामे के बीच आम जनता की परेशानियां गौण होती दिख रही हैं।
नगर निगम अब इस जगह का सुंदरीकरण करने की योजना बना रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को सार्वजनिक पार्क की सुविधा वापस मिल सके।




