ट्रेन में सफर के दौरान मिलने वाली सुविधाओं के दावों की कलई एक बार फिर कानपुर स्टेशन पर खुल गई। जोधपुर से हावड़ा जा रही 22308 एक्सप्रेस के यात्रियों के लिए सफर उस वक्त सजा बन गया, जब चलती ट्रेन में अचानक एसी ने काम करना बंद कर दिया। भीषण उमस और गर्मी के बीच कोच किसी भट्ठी से कम नहीं लग रहा था।
सफर बना सजा, बिलखते रहे बच्चे और बुजुर्ग
आगरा स्टेशन के बाद जैसे ही ट्रेन का एसी फेल हुआ, कोच के अंदर का तापमान तेजी से बढ़ गया। दमघोंटू गर्मी से बेहाल यात्रियों के पास सांस लेने के लिए भी जगह नहीं बची थी। स्थिति इतनी भयावह थी कि यात्रियों को मजबूरन कोच के कांच वाले दरवाजे और मुख्य गेट खोलने पड़े, ताकि थोड़ी ताजी हवा मिल सके। सबसे बुरा हाल बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का था, जो पसीने से तर-बतर और बेहाल नजर आए।
कानपुर स्टेशन पर हुआ हंगामा
जैसे ही ट्रेन दोपहर 1:09 बजे कानपुर सेंट्रल पहुंची, यात्रियों का सब्र का बांध टूट गया। ट्रेन से उतरते ही यात्रियों ने जमकर हंगामा किया और रेलवे की लचर व्यवस्था पर सवाल उठाए। हंगामे की सूचना मिलते ही इलेक्ट्रिकल विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। जांच में सामने आया कि एसी प्लांट के फैन में तकनीकी खराबी थी, जिसके चलते एयर कंडीशनिंग सिस्टम ठप हो गया था।
मायने और प्रभाव
रेलवे के नियमों के मुताबिक, सफर के दौरान बेसिक सुविधाएं मुहैया कराना विभाग की जिम्मेदारी है। इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं:
- मेंटेनेंस की कमी: क्या ट्रेन के रवाना होने से पहले एसी प्लांट का सही ढंग से परीक्षण किया गया था?
- सुरक्षा पर सवाल: चलती ट्रेन के दरवाजे खोलकर यात्रा करना सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक है, लेकिन यात्रियों के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं बचा था।
- यात्री सुविधा: बार-बार ऐसी घटनाओं से रेलवे की छवि पर बुरा असर पड़ रहा है, और आम जनता अपनी यात्रा को लेकर असुरक्षित महसूस करने लगी है।
तकनीकी खराबी को ठीक करने के लिए प्लेटफॉर्म नंबर छह की ओएचई (OHE) लाइन का शटडाउन लेना पड़ा, जिसके बाद करीब एक घंटे की मशक्कत से एसी बहाल हो पाया। ट्रेन को अपने निर्धारित समय से सवा घंटा देरी से गंतव्य के लिए रवाना किया गया।




