कानपुर जेल में एक और बंदी की मौत से हड़कंप
कानपुर जिला कारागार से रविवार शाम एक दुखद खबर सामने आई। देह व्यापार के मामले में जेल में बंद एक विचाराधीन बंदी की इलाज के दौरान उर्सला अस्पताल में मौत हो गई। अंबिका सिंह नामक इस बंदी की अचानक बिगड़ी तबीयत और उसके बाद अस्पताल में हुई मौत ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
52 वर्षीय अंबिका सिंह मूल रूप से हनुमंत विहार के खाड़ेपुर कर्रही इलाके का रहने वाला था। उसे रावतपुर पुलिस ने अनैतिक देह व्यापार अधिनियम की धाराओं और आईटी एक्ट के तहत करीब एक महीने पहले गिरफ्तार किया था। 16 मई 2026 को उसे न्यायिक हिरासत में जिला कारागार भेजा गया था।
जेल के भीतर कैसे बिगड़ी तबीयत?
पुलिस के अनुसार, अंबिका को शराब और पान मसाले की लत थी। 17 जून को उसने पेट दर्द और अजीब व्यवहार करने की शिकायत की थी, जिसके बाद उसे जेल के अस्पताल में रखा गया। रविवार की शाम उसकी स्थिति अचानक गंभीर हो गई, जब उसे सांस लेने में भारी तकलीफ और दस्त की शिकायत हुई। जेल गार्ड उसे लेकर उर्सला अस्पताल पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद शाम 6:35 बजे उसने दम तोड़ दिया।
मायने और प्रभाव
इस घटना ने कानपुर की जेल व्यवस्था में बंदियों की स्वास्थ्य निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि पुलिस इसे एक स्वाभाविक प्रक्रिया बता रही है, लेकिन जेल के भीतर किसी बंदी की मौत हमेशा न्यायिक जांच का विषय होती है।
- जेल प्रशासन पर दबाव: क्या जेल में कैदियों को मिलने वाली मेडिकल सुविधा पर्याप्त है?
- सुरक्षा और निगरानी: क्या विचाराधीन बंदियों के स्वास्थ्य इतिहास का सही रिकॉर्ड रखा जा रहा है?
- कानूनी प्रक्रिया: अब इस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट ही मौत की असली वजह का खुलासा कर पाएगी।
फिलहाल, मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। उसके परिवार में दो बेटे हैं, जिनका रो-रोकर बुरा हाल है। अब पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मौत किन परिस्थितियों में हुई।




