कानपुर के बिजली विभाग (केस्को) में हुए 1.52 करोड़ रुपये के बड़े स्क्रैप घोटाले ने पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। इस मामले में पुलिस ने आरोपी अवर अभियंता (JE) मुन्ना यादव को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है। केस्को प्रबंधन ने भी आरोपी को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला तब सामने आया जब 17 जून को केस्को स्टोर से गुजरात की एक कंपनी को 20.04 लाख रुपये में 35 टन स्क्रैप बेचने का सौदा हुआ। आरोप है कि मिलीभगत करके तय सीमा से कहीं ज्यादा माल ट्रक में लादकर ले जाया जा रहा था। जब जेई रमेश चंद्र ने शक होने पर शास्त्रीनगर में ट्रक को पकड़ा, तो धर्मकांटे की पर्ची में खेल का खुलासा हुआ—10 टन की अनुमति पर 22 टन लोहा लादा गया था।
एक्सईएन की भूमिका पर उठे सवाल
पुलिस हिरासत में जाने से पहले जेई मुन्ना यादव ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने विभाग के तत्कालीन एक्सईएन (XEN) श्रीकांत रंगीला समेत अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता के सबूत दिए हैं। डीसीपी सेंट्रल अतुल श्रीवास्तव के अनुसार, अब पुलिस उन सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रही है जिनका नाम इस घोटाले में सामने आया है।
कैसे होता था ‘कबाड़’ का यह खेल?
- अच्छे उपकरणों का निस्तारण: स्टोर में रखे चालू हालत वाले बिजली उपकरणों को भी स्क्रैप बताकर औने-पौने दामों में बेचा जा रहा था।
- स्टॉक में धांधली: स्टोर रजिस्टर और मूल्यांकन रिपोर्ट में हेरफेर करके विभाग को करोड़ों का चूना लगाया गया।
- जांच का दायरा: अब केस्को के पुराने रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और मूल्यांकन से जुड़े हर दस्तावेज को खंगाला जा रहा है।
मायने और प्रभाव
यह घोटाला केवल एक जेई की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह केस्को के भ्रष्टाचार की परतें खोलने वाला है। आम जनता के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि सरकारी धन का उपयोग किस तरह निजी जेबें भरने में किया जा रहा था। यदि जांच में और बड़े अधिकारी दोषी पाए जाते हैं, तो यह उत्तर प्रदेश के बिजली महकमे में जवाबदेही तय करने का एक बड़ा उदाहरण बन सकता है। भविष्य में कड़े ऑडिट और डिजिटल मॉनिटरिंग ही ऐसे घोटालों को रोक पाएंगे।




