कानपुर के कचहरी परिसर में कानून के रक्षकों के बीच ही ‘कानून हाथ में लेने’ का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक अधिवक्ता ने अपने ही साथियों पर पांच लाख रुपये के लेनदेन के विवाद में मारपीट करने और उन्हें उनके माता-पिता के साथ चैंबर में तीन घंटे तक बंधक बनाए रखने का गंभीर आरोप लगाया है। इस घटना के बाद से ही कचहरी परिसर में हलचल तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित अधिवक्ता शशांक तिवारी की ओर से कोतवाली थाने में दी गई तहरीर के अनुसार, घटना 19 अगस्त की है। शशांक का आरोप है कि रजिस्ट्री गेट के पास कुछ वकीलों ने उन्हें घेर लिया और गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी। इसके बाद उन्हें जबरन नवीन शुक्ला के चैंबर में ले जाया गया, जहाँ अन्य वकीलों ने मिलकर उन्हें बंधक बना लिया।
आरोप है कि शशांक के माता-पिता को भी वहां बुलाकर डराया-धमकाया गया। इतना ही नहीं, उनसे जबरन पांच लाख रुपये के लेनदेन का कबूलनामा लिखवाया गया और मोबाइल पर इसकी रिकॉर्डिंग भी की गई। पीड़ित का कहना है कि जब उन्होंने शिकायत करने की बात कही, तो उन्हें एससी-एसटी एक्ट और रेप जैसे गंभीर मुकदमों में फंसाने की धमकी दी गई।
पुलिस की कार्रवाई और दूसरा पक्ष
इस मामले में पुलिस ने अधिवक्ता पंकज ठाकुर, रोहित सोनकर, आशीष पांडेय, अभिषेक शुक्ला, नवीन शुक्ला और अजय अग्निहोत्री समेत 12 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। कोतवाली इंस्पेक्टर अरुण द्विवेदी ने पुष्टि की है कि बंधक बनाने, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
दूसरी ओर, आरोपी पक्ष के अधिवक्ता अजय अग्निहोत्री ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है, ‘शशांक प्रॉपर्टी के काम से भी जुड़े हैं और उन्होंने मुनाफे का लालच देकर कई वकीलों से मोटी रकम ली है। अब वह पैसा वापस करने से बचने के लिए झूठे आरोप लगा रहे हैं।’
मायने और प्रभाव
यह घटना न्यायिक परिसर की गरिमा पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। कचहरी, जिसे न्याय का मंदिर कहा जाता है, वहां इस तरह की गुंडागर्दी आम जनता के भरोसे को चोट पहुंचाती है। इसके मुख्य प्रभाव निम्नलिखित हैं:
- पेशेवर नैतिकता पर सवाल: वकीलों के आपसी झगड़े में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ना सुरक्षा और अनुशासन पर सवालिया निशान लगाता है।
- न्याय प्रक्रिया में बाधा: कचहरी परिसर में इस तरह के विवादों से मुवक्किलों और आम लोगों में भय का माहौल पैदा होता है।
- कानूनी लड़ाई का नया मोड़: अब इस मामले में पुलिस जांच के साथ-साथ यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह वास्तव में वित्तीय धोखाधड़ी का मामला है या मात्र आपसी रंजिश।





