कानपुर में एक रोंगटे खड़े कर देने वाला हादसा सामने आया है, जहां ड्यूटी पर तैनात तीन लाइनमैन की जान पर बन आई। बारादेवी मंदिर के पास स्ट्रीट लाइट ठीक करने के दौरान एक छोटी सी चूक ने बड़ी तबाही मचा दी। बांस की सीढ़ी के हाई टेंशन (HT) लाइन के संपर्क में आते ही करंट का ऐसा जोरदार झटका लगा कि तीन कर्मचारी गंभीर रूप से झुलस गए।
क्या है पूरा मामला?
शनिवार को किदवईनगर इलाके में बारादेवी मंदिर के पश्चिम द्वार के पास नगर निगम के मार्ग प्रकाश विभाग की टीम स्ट्रीट लाइट की मरम्मत के लिए पहुंची थी। टीम में संजय कुमार, फैजान और कुनाल शामिल थे। जैसे ही उन्होंने खंभे पर चढ़ने के लिए हरे बांस की सीढ़ी लगाई, वह ऊपर से गुजर रही हाई वोल्टेज तारों को छू गई।
करंट का प्रभाव इतना भीषण था कि सीढ़ी पकड़े हुए दो कर्मचारी झटके के साथ दूर जा गिरे, जबकि सीढ़ी पर चढ़ा कर्मचारी फैजान तारों से चिपक गया। आनन-फानन में सहकर्मियों ने शोर मचाया और प्लास की मदद से उसे अलग किया। इस हादसे में फैजान के दोनों हाथ बुरी तरह झुलस गए हैं और उसका जबड़ा भी टूट गया है, जबकि अन्य दो कर्मचारियों को भी चोटें आई हैं।
विभाग की लापरवाही या तकनीकी चूक?
इस हादसे के बाद विभाग पर सवाल उठने लगे हैं। घायल कर्मचारियों के साथियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि नगर निगम विभाग द्वारा उन्हें सुरक्षा उपकरण के बजाय ‘हरे बांस’ की सीढ़ी दी गई थी। जानकारों का मानना है कि नमी युक्त हरा बांस बिजली का सुचालक बन जाता है, जिससे यह हादसा और भी घातक हो गया।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्यों जरूरी है यह खबर
- सुरक्षा मानकों पर सवाल: नगर निगम के कर्मचारियों को खतरनाक काम करने के लिए दिए जाने वाले उपकरणों की गुणवत्ता पर अब बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
- सुरक्षित रखरखाव का अभाव: अक्सर रिहायशी इलाकों में HT लाइनें बहुत नीचे से गुजरती हैं, जो आम जनता और कर्मचारियों, दोनों के लिए बड़ा खतरा बनी हुई हैं।
- जवाबदेही तय करना: यदि विभाग ने सुरक्षा किट या सही उपकरण नहीं दिए थे, तो क्या उन अधिकारियों पर कार्रवाई होगी जो इन कर्मचारियों की जान जोखिम में डालकर काम करवा रहे थे?
किदवईनगर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल, अस्पताल में भर्ती घायल कर्मचारियों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है, लेकिन कानपुर का यह हादसा बिजली विभाग के लचर सेफ्टी प्रोटोकॉल की पोल खोलने के लिए काफी है।




