क्या आपने कभी सोचा है कि लैब के अंदर बिल्कुल सूरज जैसी रोशनी तैयार की जा सकती है? आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) अब इस तकनीक को हकीकत में बदलने जा रहा है। संस्थान ने देश का पहला ‘कंसंट्रेटेड फोटोवोल्टिक्स (CPV) सन सिम्युलेटर’ स्थापित करने का बीड़ा उठाया है, जो सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ी छलांग है।
भारत में पहली बार ऐसी सुविधा
अब तक भारत में सामान्य सोलर पैनलों की जांच के लिए सुविधाएं तो मौजूद थीं, लेकिन सीपीवी (CPV) मॉड्यूल की टेस्टिंग के लिए हमें विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था। आईआईटी कानपुर ने बंगलूरू की कंपनी ‘नेक्सपीवी एनर्जी सिस्टम’ के साथ हाथ मिलाकर इस कमी को दूर करने का फैसला किया है।
संस्थान के टेक्नोपार्क की सदस्य कंपनी ‘इनवेरिएंस ऑटोमेशन’ भी इस प्रोजेक्ट में तकनीकी मदद दे रही है। यह सिम्युलेटर न केवल सूरज की रोशनी जैसी आभासी स्थिति पैदा करेगा, बल्कि उन सटीक परिस्थितियों का भी निर्माण करेगा जिनकी जरूरत सीपीवी मॉड्यूल्स की गुणवत्ता जांचने के लिए होती है।

क्या है ये सन सिम्युलेटर और कैसे काम करेगा?
सन सिम्युलेटर एक ऐसी अत्याधुनिक मशीन है जो प्रयोगशाला के भीतर सूर्य की किरणों की तीव्रता, दिशा और स्पेक्ट्रम को हूबहू कॉपी करती है।
- सीपीवी की खासियत: सामान्य सोलर पैनल पूरी सतह पर सेल का उपयोग करते हैं, जबकि सीपीवी में लेंस के जरिए रोशनी को एक छोटे बिंदु पर केंद्रित किया जाता है।
- अति-दक्षता: यह तकनीक कम जगह में कहीं अधिक बिजली पैदा करने में सक्षम है।
- सटीक टेस्टिंग: चूंकि सीपीवी को सीधी और समानांतर किरणों की जरूरत होती है, इसलिए यह मशीन बिल्कुल सटीक वातावरण तैयार करेगी।
मायने और प्रभाव: आम आदमी को क्या मिलेगा?
यह खबर केवल इंजीनियरिंग का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर आपके भविष्य पर पड़ेगा। भारत का लक्ष्य 2070 तक ‘नेट-जीरो’ उत्सर्जन हासिल करना है, जिसमें सौर ऊर्जा की भूमिका सबसे बड़ी है।
जब भारत में ही टेस्टिंग की विश्वस्तरीय सुविधा उपलब्ध होगी, तो सोलर मॉड्यूल बनाने वाली कंपनियों का खर्च कम होगा। इसका सीधा फायदा आम जनता को सस्ती बिजली और बेहतर सोलर उत्पादों के रूप में मिलेगा। प्रो. आशीष गर्ग की टीम के इस प्रयास से सौर तकनीक अब लैब से निकलकर तेजी से हमारे घरों की छतों तक पहुंच सकेगी, जिससे हरित ऊर्जा का सपना साकार होगा।

